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चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी वैश्विक चिंता, अमेरिका ने बीजिंग से मांगी पारदर्शिता, हिंद-प्रशांत में बढ़ा तनाव

चीन के हालिया लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई रणनीतिक बहस छेड़ दी है। अमेरिका ने बीजिंग से अधिक पारदर्शिता बरतने और हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने की अपील की है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है।

मिसाइल परीक्षण पर अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता

चीन द्वारा पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण के बाद अमेरिका ने अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ऐसे परीक्षणों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि जब दुनिया परमाणु प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक जवाबदेही और खुलापन दिखाना चाहिए। अमेरिका ने बीजिंग से हथियार नियंत्रण संबंधी औपचारिक वार्ता में शामिल होने का भी आग्रह किया।

क्या था चीन का मिसाइल परीक्षण?

चीन ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उसने एक पनडुब्बी से बिना परमाणु हथियार वाली इंटरकॉन्टिनेंटल-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया। चीनी अधिकारियों के अनुसार, मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था और उसे दक्षिणी प्रशांत महासागर के निर्धारित क्षेत्र में गिराया गया। बीजिंग का दावा है कि परीक्षण से पहले संबंधित देशों को इसकी जानकारी दे दी गई थी। रक्षा विशेषज्ञ इसे चीन की समुद्र-आधारित रणनीतिक परमाणु क्षमता के सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।

अमेरिका ने दोहराई हथियार नियंत्रण की मांग

अमेरिका ने कहा कि चीन को लंबी दूरी की मिसाइल लॉन्च और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों के लिए नियमित सूचना साझा करने की व्यवस्था अपनानी चाहिए। वॉशिंगटन का कहना है कि परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए संवाद और पारदर्शिता आवश्यक है। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी दोहराया कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

क्षेत्रीय देशों ने भी जताई चिंता

चीन के इस परीक्षण पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों ने भी प्रतिक्रिया दी है। न्यूजीलैंड ने इसे चिंता का विषय बताया, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं जापान ने भी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और मिसाइल क्षमताओं पर चिंता व्यक्त की। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि क्षेत्र के कई देश चीन की सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

हिंद-प्रशांत में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनता जा रहा है। मिसाइल परीक्षण, नौसैनिक गतिविधियां और रक्षा साझेदारियों के विस्तार जैसे घटनाक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे माहौल में संवाद, सैन्य पारदर्शिता और कूटनीतिक संपर्क को बढ़ावा देना तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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