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शरीर में कैंसर बनने से पहले क्या होता है? जानिए कैसे एक सामान्य सेल धीरे-धीरे कैंसर सेल में बदल सकती है

कैंसर का नाम सुनते ही सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इसकी शुरुआत कैसे होती है? क्या कैंसर अचानक विकसित हो जाता है या यह शरीर में लंबे समय से चल रही किसी प्रक्रिया का नतीजा होता है? विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर एक दिन में नहीं बनता। यह शरीर की कोशिकाओं (Cells) में धीरे-धीरे होने वाले आनुवंशिक (Genetic) बदलावों का परिणाम होता है। National Cancer Institute (NCI) के मुताबिक, सामान्य कोशिकाओं की वृद्धि और नष्ट होने की प्राकृतिक प्रक्रिया में गड़बड़ी आने पर कुछ कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, जो समय के साथ कैंसर का रूप ले सकती हैं।

सामान्य कोशिकाएं कैसे काम करती हैं?

मानव शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना है। सामान्य परिस्थितियों में प्रत्येक कोशिका एक निश्चित जीवनचक्र का पालन करती है। कोशिकाएं जरूरत के अनुसार बनती हैं, शरीर के विभिन्न अंगों का कार्य करती हैं और समय आने पर नष्ट हो जाती हैं, ताकि उनकी जगह नई स्वस्थ कोशिकाएं बन सकें। यह संतुलित प्रक्रिया शरीर के विकास, ऊतकों की मरम्मत और अंगों के सामान्य कार्य के लिए बेहद जरूरी होती है। जब यह व्यवस्था सही तरीके से चलती रहती है, तब शरीर स्वस्थ रहता है और असामान्य कोशिकाओं को बढ़ने का मौका नहीं मिलता।

DNA में बदलाव कैसे बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा?

National Cancer Institute के अनुसार, हर कोशिका के भीतर मौजूद DNA यह तय करता है कि कोशिका कब बढ़ेगी, कब विभाजित होगी और कब समाप्त होगी। यदि किसी कारण से DNA में बदलाव (Mutation) हो जाए, तो यह नियंत्रण प्रणाली प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगती हैं और समय आने पर भी नष्ट नहीं होतीं। लगातार बढ़ती हुई ये असामान्य कोशिकाएं एक जगह इकट्ठा होकर ट्यूमर (Tumor) बना सकती हैं। हालांकि, हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता। कुछ ट्यूमर Benign (सौम्य) होते हैं, जबकि Malignant (घातक) ट्यूमर आसपास के ऊतकों में फैलने और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं।

क्या हर DNA Mutation का मतलब कैंसर होता है?

विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि इसका उत्तर नहीं है। शरीर में प्रतिदिन कई कोशिकाओं के DNA में छोटे-छोटे बदलाव होते रहते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में शरीर की प्राकृतिक मरम्मत प्रणाली और प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) इन परिवर्तनों को ठीक कर देते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब यह सुरक्षा तंत्र असामान्य कोशिकाओं को नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त कोशिकाएं लगातार बढ़ती रहती हैं और समय के साथ कैंसर विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।

किन कारणों से बढ़ सकता है कैंसर का जोखिम?

हर प्रकार के कैंसर का कारण अलग हो सकता है, लेकिन कुछ ऐसे जोखिम कारक हैं जो कई प्रकार के कैंसर की संभावना बढ़ा सकते हैं। इनमें तंबाकू और धूम्रपान का सेवन, अत्यधिक शराब पीना, लंबे समय तक सूर्य की हानिकारक UV किरणों के संपर्क में रहना, कुछ वायरस और संक्रमण, बढ़ती उम्र, पारिवारिक इतिहास, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली शामिल हैं। हालांकि, इन जोखिम कारकों का होना यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर होगा, बल्कि ये केवल इसकी संभावना को बढ़ा सकते हैं।

इन संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

कैंसर के शुरुआती चरण में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन यदि बिना कारण वजन कम होने लगे, लगातार थकान महसूस हो, शरीर में कोई गांठ बन जाए, कोई घाव लंबे समय तक न भरे, लगातार खांसी बनी रहे या मल-मूत्र की आदतों में असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। ये लक्षण कई अन्य सामान्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, इसलिए स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर विकल्प है।

स्वस्थ जीवनशैली से काफी हद तक कम किया जा सकता है जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार, हर प्रकार के कैंसर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, आवश्यक टीकाकरण करवाना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना लंबे समय में लाभदायक साबित हो सकता है। National Cancer Institute का मानना है कि शरीर में होने वाले शुरुआती बदलावों को समझना और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना कैंसर से बचाव और शुरुआती पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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