‘भारत-पाकिस्तान में परमाणु युद्ध टलवाया’, ट्रंप का फिर दावा; बोले- 11 विमान गिरे, करोड़ों जानें बचीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हालात परमाणु युद्ध तक पहुंचने वाले थे, लेकिन उनकी ओर से दी गई भारी टैरिफ की चेतावनी के बाद तनाव कम हुआ। ट्रंप ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से करोड़ों लोगों की जान बची, हालांकि भारत पहले भी ऐसे दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुका है।
ट्रंप बोले- टैरिफ की चेतावनी देकर रोका संघर्ष
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों को साफ संदेश दिया था कि यदि सैन्य टकराव जारी रहा तो दोनों देशों पर 200 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाएगा। उनके अनुसार आर्थिक दबाव उनकी विदेश नीति का अहम हिस्सा रहा है और इसी रणनीति की वजह से कई अंतरराष्ट्रीय संघर्ष टाले जा सके। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों ने उनकी चेतावनी को गंभीरता से लिया और हालात को और बिगड़ने से रोका गया।
‘परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे दोनों देश’
ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया था। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष के दौरान 11 विमान मार गिराए गए थे और दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच हालात बेहद संवेदनशील हो चुके थे। उनके मुताबिक यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो स्थिति बड़े युद्ध का रूप ले सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस हस्तक्षेप से लगभग तीन करोड़ लोगों की जान बचाने में मदद मिली।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भी लिया जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से उनके प्रयासों की सराहना की गई और कहा गया कि उनकी पहल से बड़ा युद्ध टल गया। ट्रंप ने इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि व्यापारिक नीति और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए भी किया जा सकता है।
भारत पहले ही खारिज कर चुका है मध्यस्थता का दावा
भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से नहीं हुआ था। नई दिल्ली का आधिकारिक रुख है कि युद्धविराम का निर्णय दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत के बाद लिया गया था। भारत ने कई बार दोहराया है कि किसी भी बाहरी मध्यस्थता की भूमिका नहीं रही और यह फैसला दोनों देशों के बीच स्थापित सैन्य संवाद तंत्र के तहत हुआ।
बयानों के बीच जारी है कूटनीतिक बहस
ट्रंप का यह दावा पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी वह कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का श्रेय खुद को दे चुके हैं। वहीं भारत का आधिकारिक रुख लगातार यही रहा है कि उसकी विदेश और सुरक्षा नीति स्वतंत्र है तथा किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर निर्णय राष्ट्रीय हितों और द्विपक्षीय प्रक्रियाओं के आधार पर लिए जाते हैं। ऐसे में ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक बहस को हवा दे दी है।