जयपुर में सिख समाज का आक्रोश, गुरुद्वारा तोड़े जाने पर ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे
पाकिस्तान के फर्रुखाबाद में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराए जाने के बाद राजस्थान की राजधानी जयपुर में भारी आक्रोश देखने को मिला। राजापार्क, जयपुर स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे के बाहर सिख समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। इस घटना को लेकर सिख समाज ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कार्रवाई की मांग की है।
जयपुर में सिख समाज का जोरदार विरोध प्रदर्शन
घटना की खबर फैलते ही जयपुर में सिख समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। राजापार्क स्थित गुरुद्वारे के बाहर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर लोगों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला बताते हुए पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। माहौल में आक्रोश के बावजूद प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारों की गूंज पूरे इलाके में सुनाई दी।
125 साल पुराने गुरुद्वारे के ध्वस्तीकरण पर नाराजगी
सिख समाज के नेताओं ने बताया कि फर्रुखाबाद में तोड़ा गया गुरुद्वारा सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि 125 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर था। इसका संबंध विभाजन पूर्व इतिहास और सिख समुदाय की आस्था से जुड़ा था। इस धरोहर के ध्वस्त होने को लेकर लोगों ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि यह कदम अल्पसंख्यकों की धार्मिक पहचान पर सीधा प्रहार है। समाज का कहना है कि ऐसी घटनाएं सांस्कृतिक विरासत को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
रागी जत्थों और संगठनों ने की कड़ी निंदा
राजस्थान के कई जिलों के सिख संगठनों और रागी जत्थों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। वक्ताओं ने कहा कि सिख समाज हमेशा शांति और सेवा का प्रतीक रहा है, लेकिन उनके धार्मिक स्थलों के साथ ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है। संगठनों ने मांग की कि इस तरह की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।
भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शन के अंत में सिख समाज ने भारत सरकार से इस मामले में कड़ा रुख अपनाने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर उठाया जाना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान में मौजूद अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों और सिख समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक दबाव बनाने की अपील की गई।
शांतिपूर्ण तरीके से हुआ प्रदर्शन
प्रशासन की निगरानी में हुआ यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। सिख समाज ने अपनी परंपरा के अनुसार अनुशासित तरीके से विरोध दर्ज कराया और गुरुद्वारा साहिब में विशेष अरदास भी की गई। इसमें पाकिस्तान में शांति और सिख विरासत की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की गई।