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तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि

ईरान की राजधानी तेहरान में देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आयोजित अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि समारोह में हजारों लोगों के साथ भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी हिस्सा लिया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम को ईरान के लिए भावनात्मक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रैंड मोसल्ला परिसर में उमड़ा जनसैलाब

तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिकों, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई की रस्में पूरी की गईं। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए प्रशासन ने अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित किए, जिससे पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जताया सम्मान

अंतिम दर्शन के दौरान भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और मौन रखकर सम्मान व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात कर संवेदनाएं भी प्रकट कीं। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापार, ऊर्जा, समुद्री संपर्क, क्षेत्रीय सहयोग और सांस्कृतिक रिश्ते रहे हैं। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ अंतिम संस्कार

हाल के क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम के दौरान अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश से पहले सभी लोगों की गहन जांच की गई। सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन और विशेष सुरक्षा इकाइयों की सहायता से पूरे आयोजन पर नजर रखी गई। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल भी लागू किए गए।

युद्धविराम के बाद शुरू हुई अंतिम संस्कार प्रक्रिया

अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार नहीं हो सका था। क्षेत्र में हालिया सैन्य संघर्ष और सुरक्षा कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। प्रारंभिक युद्धविराम लागू होने के बाद प्रशासन ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। हालांकि क्षेत्रीय हालात पर अब भी लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए सतर्क हैं।

राष्ट्रीय एकता का संदेश देने की अपील

अंतिम संस्कार से पहले ईरान की संसद के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने इसे केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, जनता की व्यापक भागीदारी ईरान की एकजुटता और राष्ट्रीय भावना का संदेश दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

भारत-ईरान संबंधों पर रहेगी नजर

अंतिम संस्कार ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बाद युद्धविराम लागू है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बावजूद भारत और ईरान ऊर्जा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बनाए रखने का प्रयास करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को क्षेत्रीय स्थिरता, कूटनीतिक संतुलन और पारंपरिक संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

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