यमुना जल समझौते पर गहलोत का सरकार पर निशाना, बोले- 0.8 एमसीएफ पानी मिलने पर ही मानी जाएगी असली सफलता
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यमुना जल समझौते को लेकर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल समझौतों और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि राजस्थान को उसका वास्तविक जल अधिकार मिलना चाहिए। गहलोत ने स्पष्ट कहा कि यदि शेखावाटी तक यमुना का पानी पहुंचता है तो वह स्वयं मुख्यमंत्री का स्वागत करेंगे, लेकिन असली उपलब्धि तब मानी जाएगी जब पंजाब से समझौते के अनुसार राजस्थान को 0.8 एमसीएफ पानी प्राप्त होगा।
‘यमुना का पानी आएगा तो सबसे पहले मैं स्वागत करूंगा’
जयपुर स्थित अपने सिविल लाइंस आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि जिस दिन यमुना का पानी नीमकाथाना और शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचेगा, वह खुद मुख्यमंत्री निवास जाकर सरकार का अभिनंदन करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को राजनीतिक रूप से तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार जनता को कागजी समझौतों से नहीं बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से मतलब है।
0.8 एमसीएफ पानी का मुद्दा फिर उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत राजस्थान को पंजाब से 0.8 एमसीएफ पानी मिलना है, लेकिन वर्षों बाद भी यह अधिकार पूरी तरह लागू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार और गृह मंत्री इस विषय में सक्रिय हैं तो उन्हें इस लंबित मुद्दे का भी समाधान कराना चाहिए। उनके अनुसार यही वह कदम होगा जिसे राजस्थान के हित में वास्तविक सफलता माना जाएगा।
नहरी क्षेत्रों में जल संकट पर जताई चिंता
गहलोत ने कहा कि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर सहित नहरी क्षेत्रों में किसानों को पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नहरों के रखरखाव के बाद भी समय पर पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे सिंचाई और पेयजल दोनों प्रभावित हुए। उनका कहना था कि यदि राजस्थान को उसका पूरा जल अधिकार मिले तो इन क्षेत्रों के किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
सरकार पर लापरवाही का आरोप, किसानों के हित में कार्रवाई की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार को राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर किसानों और आम नागरिकों के हित में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में पंजाब सरकारों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर राजस्थान के हिस्से का पानी सुनिश्चित किया जाता था। गहलोत ने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए और शहरों में लोग पेयजल के लिए परेशान हैं। उन्होंने सरकार से जल प्रबंधन को प्राथमिकता देने और प्रदेश के संवैधानिक अधिकार के अनुरूप पानी उपलब्ध कराने की मांग की।