35 साल तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी, रिटायरमेंट से एक दिन पहले शिक्षक बर्खास्त
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में सरकारी सेवा से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर करीब 35 वर्षों तक सरकारी नौकरी करने वाले शिक्षक को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय जांच में प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाने के बाद जिला परिषद ने न केवल सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया, बल्कि पूरी नौकरी के दौरान मिले वेतन और अन्य वित्तीय लाभों की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
भाई की शिकायत से खुला वर्षों पुराना फर्जीवाड़ा
यह मामला वर्ष 2022 में तब सामने आया, जब शिक्षक के भाई ने विभाग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षक के शैक्षणिक दस्तावेजों की विस्तृत जांच करवाई। जांच में सामने आया कि नियुक्ति के समय जमा किए गए कई प्रमाण-पत्र वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इसके बाद पूरे मामले की गहन जांच शुरू की गई। विभागीय अधिकारियों ने संबंधित बोर्ड और अभिलेखों का सत्यापन कराया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जांच पूरी होने के बाद मामला जिला स्थापना समिति के समक्ष रखा गया।
जांच में फर्जी अंकतालिका और प्रमाण-पत्र की पुष्टि
जांच के दौरान सामने आया कि शिक्षक ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षा की अंकतालिकाओं में कथित रूप से अंक बढ़ाकर प्रथम श्रेणी दर्शाई थी। इसके अलावा नियुक्ति के लिए आवश्यक प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज भी विभागीय रिकॉर्ड में प्रमाणित नहीं मिले। संबंधित प्रमाण-पत्रों का आधिकारिक अभिलेखों में कोई अस्तित्व नहीं पाया गया। अधिकारियों ने सभी दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद उन्हें कूटरचित और फर्जी माना। इसी आधार पर शिक्षक की नियुक्ति को अवैध घोषित करने की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
सेवानिवृत्ति से पहले सेवा समाप्त, वेतन वसूली भी होगी
जिला परिषद ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की संबंधित कानूनी धाराओं के तहत शिक्षक को सरकारी सेवा से हटाने का निर्णय लिया। यह कार्रवाई उनकी सेवानिवृत्ति से केवल एक दिन पहले की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त होने के कारण पूरी सेवा अवधि के दौरान मिले वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय लाभों की वसूली की जाएगी। विभाग अब इस संबंध में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर रहा है।
न्यायालय से राहत नहीं मिली, समिति ने लिया अंतिम फैसला
विभागीय जांच शुरू होने के बाद शिक्षक ने कानूनी राहत पाने का प्रयास किया और न्यायालय का भी रुख किया। हालांकि, दस्तावेजों के सत्यापन में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद उन्हें किसी स्तर पर राहत नहीं मिली। इसके बाद जिला स्थापना समिति की बैठक में सभी उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट पर विचार किया गया। समिति ने सर्वसम्मति से शिक्षक को सेवा से हटाने का प्रस्ताव पारित किया। बैठक में जिला परिषद और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया तथा नियमानुसार कार्रवाई को मंजूरी दी।
विभाग ने सख्ती के संकेत दिए
शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की जांच लगातार की जा रही है। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर हुई पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यह मामला सरकारी सेवा में सत्यापन प्रक्रिया की अहमियत को भी रेखांकित करता है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर सख्ती से कार्रवाई जारी रहेगी।