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पैरों की सूजन को न करें नजरअंदाज, हार्ट, किडनी और लिवर की बीमारी का हो सकता है संकेत

पैरों में हल्की सूजन अक्सर लंबे समय तक खड़े रहने, ज्यादा चलने या गर्म मौसम के कारण हो सकती है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के पैरों में बार-बार या लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह हार्ट, किडनी, लिवर या रक्त संचार से जुड़ी गंभीर समस्याओं का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। ऐसे में समय रहते जांच और सही उपचार बेहद जरूरी है।

क्या होती है पैरों की सूजन?

मेडिकल भाषा में पैरों की सूजन को एडिमा (Edema) कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब शरीर के ऊतकों (टिश्यू) में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यदि सूजन वाले हिस्से को दबाने पर कुछ समय के लिए गड्ढा बन जाए, तो इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है। यह कई बार किसी गंभीर बीमारी की ओर संकेत कर सकता है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

हार्ट की कमजोरी भी हो सकती है वजह

जब हृदय शरीर में पर्याप्त क्षमता से रक्त पंप नहीं कर पाता, तो रक्त और तरल पदार्थ पैरों, टखनों और पंजों में जमा होने लगते हैं। यह स्थिति कंजेस्टिव हार्ट फेलियर से जुड़ी हो सकती है। यदि पैरों की सूजन के साथ सांस फूलना, जल्दी थकान होना या सीने में भारीपन महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

किडनी की खराब कार्यक्षमता बढ़ा सकती है सूजन

किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने का काम करती है। जब इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसका असर पैरों, टखनों और कई बार चेहरे पर भी दिखाई देता है। विशेष रूप से क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीजों में यह समस्या आम देखी जाती है।

लिवर और प्रोटीन की कमी भी बन सकती है कारण

लिवर शरीर में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यदि लिवर सिरोसिस या अन्य गंभीर रोगों के कारण एल्ब्यूमिन का स्तर कम हो जाए, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। इसके अलावा कुपोषण या शरीर में प्रोटीन की कमी भी पैरों की सूजन का कारण बन सकती है।

ब्लड क्लॉट और दवाओं के दुष्प्रभाव का भी रखें ध्यान

यदि पैरों की नसों में रक्त का थक्का (ब्लड क्लॉट) बन जाए, तो रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है और एक पैर में अचानक सूजन दिखाई दे सकती है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्मोनल दवाएं, स्टेरॉयड और कुछ दर्द निवारक दवाओं के दुष्प्रभाव से भी पैरों में सूजन आ सकती है। यदि किसी नई दवा के बाद यह समस्या शुरू हो, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

पैरों की सूजन से कैसे बचें?

पैरों की सूजन से बचने के लिए लंबे समय तक लगातार बैठने या खड़े रहने से बचें। भोजन में नमक की मात्रा सीमित रखें, पर्याप्त पानी पिएं और शरीर का वजन संतुलित बनाए रखें। काम के दौरान समय-समय पर पैरों को हिलाते रहें और आराम करते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखने की आदत डालें। यदि सूजन बार-बार हो रही हो या उसके साथ सांस फूलना, तेज दर्द, बुखार या त्वचा का रंग बदलने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

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