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सेशेल्स में गूंजा ‘बदलूराम का बदन’, गीत सुनकर गर्व से खड़े हो गए पीएम मोदी

सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में उस समय भावुक और गौरवपूर्ण माहौल बन गया, जब भारतीय सेना की असम रेजिमेंट का प्रसिद्ध रेजिमेंटल गीत ‘बदलूराम का बदन’ गूंजा। समारोह में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस गीत को सुनते ही सम्मान में खड़े हो गए। यह पल भारत और सेशेल्स के मजबूत रक्षा संबंधों के साथ-साथ भारतीय सैनिकों की वीर परंपरा का भी प्रतीक बन गया।

राष्ट्रीय दिवस समारोह में दिखी भारत-सेशेल्स की मित्रता

पूर्वी अफ्रीका के द्वीपीय देश सेशेल्स ने 29 जून को अपना 50वां राष्ट्रीय दिवस मनाया। इस अवसर पर भारतीय सेना की असम रेजिमेंट की टुकड़ी और भारतीय नौसेना के बैंड ने परेड में हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS तरकश और INS इक्षक भी समारोह का हिस्सा बने। मार्च के दौरान असम रेजिमेंट का मशहूर गीत ‘बदलूराम का बदन’ गाया गया, जिसने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

गीत सुनते ही सम्मान में खड़े हुए प्रधानमंत्री मोदी

समारोह के दौरान जैसे ही असम रेजिमेंट का रेजिमेंटल गीत बजना शुरू हुआ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मान व्यक्त करते हुए तुरंत खड़े हो गए। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस पल का उल्लेख करते हुए कहा कि सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारतीय सैन्य टुकड़ियों की भागीदारी दोनों देशों के गहरे और मजबूत संबंधों का प्रतीक है। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी यादगार बन गया।

कौन थे बदलूराम, जिनके नाम पर बना यह गीत?

बदलूराम ब्रिटिश भारतीय सेना की असम रेजिमेंट की पहली बटालियन में राइफलमैन थे। वर्ष 1944 में कोहिमा की ऐतिहासिक लड़ाई के दौरान उन्होंने बहादुरी से मोर्चा संभाला। शुरुआती संघर्ष में वे शहीद हो गए, लेकिन प्रशासनिक चूक के कारण उनका नाम राशन सूची से नहीं हटाया गया। परिणामस्वरूप यूनिट को अतिरिक्त राशन मिलता रहा, जिसने घेराबंदी के दौरान सैनिकों की मदद की और कठिन परिस्थितियों में उन्हें जीवित रहने का सहारा दिया।

शहादत से जन्मी अमर सैन्य परंपरा

बदलूराम की शहादत और उनके नाम पर मिलने वाले अतिरिक्त राशन की कहानी बाद में सैनिकों के बीच प्रेरणा का प्रतीक बन गई। वर्ष 1946 में मेजर एम.टी. प्रॉक्टर ने इसी घटना से प्रेरित होकर ‘बदलूराम का बदन’ गीत की रचना की। समय के साथ यह गीत असम रेजिमेंट की पहचान बन गया और आज भी रेजिमेंट के प्रशिक्षण, शपथ ग्रहण समारोह और सैन्य आयोजनों में पूरे गर्व के साथ गाया जाता है।

आज भी सैनिकों के उत्साह का प्रतीक है यह गीत

‘बदलूराम का बदन’ केवल एक रेजिमेंटल गीत नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के साहस, त्याग और साथियों के प्रति समर्पण की कहानी भी है। यही कारण है कि यह गीत देश-विदेश में होने वाले सैन्य आयोजनों में विशेष स्थान रखता है। सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में इसकी प्रस्तुति ने एक बार फिर भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया।

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