अलवर के बाजार में घुसा विशाल मॉनिटर लिजार्ड, रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित पकड़ा
अलवर शहर के पुराना स्टेशन रोड स्थित सामान्य अस्पताल के पास सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक विशाल मॉनिटर लिजार्ड (गोहरा) अचानक दुकानों में घुस गया। वन्यजीव को देखकर दुकानदार और राहगीर घबरा गए तथा मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू किया और लोगों से ऐसे वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाने की अपील की।
दुकानों में घुसते ही मचा हड़कंप
पुराना स्टेशन रोड स्थित सामान्य अस्पताल के पास खंडेलवाल स्टोर के संचालक राजेंद्र कुमार ने बताया कि विशालकाय गोहरा पहले पास की एक दुकान में घुस गया। वहां लोगों की भीड़ और शोर-शराबे से घबराकर वह बाहर निकला और सीधे उनकी दुकान में पहुंच गया। दुकान के अंदर वन्यजीव को देखते ही ग्राहक और कर्मचारी डरकर बाहर निकल आए। कुछ ही देर में आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे बाजार में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित किया वन्यजीव
घटना की जानकारी मिलते ही दुकानदार ने वन्यजीव रेस्क्यूअर विवेक जसाईवाल को सूचना दी। सूचना पर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू रिसर्च सेंटर (WRRC) की टीम के सदस्य गोविंद तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सावधानी और धैर्य के साथ काफी मशक्कत के बाद मॉनिटर लिजार्ड को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। टीम ने बताया कि वन्यजीव पूरी तरह सुरक्षित है और उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ा जाएगा, ताकि वह सामान्य वातावरण में वापस लौट सके।
‘गोहरा’ जहरीला नहीं, भ्रम से बचें
WRRC टीम के सदस्य गोविंद ने बताया कि स्थानीय भाषा में इस वन्यजीव को ‘पाटागोह’ या ‘गोहरा’ कहा जाता है, जबकि इसका वास्तविक नाम मॉनिटर लिजार्ड है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम लोगों में इसे लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। अधिकांश लोग इसे जहरीला समझते हैं, जबकि इसमें कोई विष नहीं होता। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि यह वन्यजीव कभी रिहायशी इलाके में दिखाई दे तो घबराने या उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन्यजीव रेस्क्यू टीम या संबंधित विभाग को सूचना दें।
वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और मौसम में बदलाव के दौरान कई वन्यजीव भोजन या सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना ही सबसे बेहतर उपाय है। इससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि वन्यजीवों का संरक्षण भी संभव हो पाता है। समय पर किए गए इस रेस्क्यू से एक संभावित अप्रिय स्थिति टल गई।