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सरिस्का में बाघ पुनर्स्थापन के 18 साल पूरे, अलवर में राष्ट्रीय कार्यशाला; 11 राज्यों के वन्यजीव विशेषज्ञ हुए शामिल

राजस्थान के अलवर में सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन के 18 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की ओर से ‘बाघ पुनर्स्थापन: अवसर एवं चुनौतियां’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में देश के 11 राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, 20 टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों के फील्ड डायरेक्टर सहित कई वन्यजीव विशेषज्ञों ने भाग लिया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जबकि राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

बाघ संरक्षण पर मंथन के लिए जुटे देशभर के विशेषज्ञ

अलवर के एक होटल में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य बाघ संरक्षण, पुनर्स्थापन और वन्यजीव आवास प्रबंधन से जुड़े अनुभवों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना रहा। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाघ संरक्षण की स्थिति, नई रणनीतियों, तकनीकी अनुभवों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों ने चीता पुनर्वास कार्यक्रम के अनुभव भी साझा किए, जिससे अन्य राज्यों को संरक्षण कार्यों में नई दिशा मिल सके।

सरिस्का की सफलता बनी दुनिया के लिए मिसाल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि 28 जून 2008 को सरिस्का में दुनिया का पहला सफल बाघ पुनर्स्थापन अभियान शुरू हुआ था, जिसने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नया इतिहास रचा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब सरिस्का से बाघ पूरी तरह समाप्त हो चुके थे, लेकिन आज यहां 56 बाघों की मौजूदगी वैज्ञानिक संरक्षण, वन विभाग की मेहनत और स्थानीय समुदाय के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने इसे प्रकृति के पुनर्जागरण की प्रेरणादायक कहानी बताया।

वनकर्मियों और स्थानीय समुदाय की सराहना

भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि का श्रेय वन विभाग के अधिकारियों, वनकर्मियों, वैज्ञानिकों, वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों को देते हुए कहा कि उनके समर्पण और निरंतर प्रयासों ने असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वन्यजीव संरक्षण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है और आज दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में सुरक्षित हैं, जो देश की संरक्षण नीति और जनभागीदारी का प्रमाण है।

वन मंत्री संजय शर्मा ने गिनाईं राजस्थान की उपलब्धियां

राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने सरिस्का सहित प्रदेश के अन्य वन क्षेत्रों में चल रहे संरक्षण कार्यों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरिस्का आज देश के सफल बाघ पुनर्स्थापन मॉडलों में शामिल है। कभी बाघ विहीन हो चुके इस अभयारण्य में आज 56 बाघों की मौजूदगी राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने भविष्य में वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।

डॉक्यूमेंट्री और फील्ड विजिट भी रही आकर्षण का केंद्र

कार्यशाला के दौरान प्रसिद्ध वन्यजीव फिल्म निर्माता नल्ला मुथु द्वारा तैयार की गई सरिस्का टाइगर पुनर्स्थापन पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। नल्ला मुथु इससे पहले रणथंभौर और सरिस्का के बाघों पर कई चर्चित डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं। कार्यक्रम के समापन के बाद सभी प्रतिभागियों को सरिस्का टाइगर रिजर्व का फील्ड विजिट भी कराया गया, जहां उन्होंने संरक्षण कार्यों और बाघों के प्राकृतिक आवास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

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