हिंद महासागर में भारत का अहम साझेदार बना सेशेल्स, चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच क्यों बढ़ी इस छोटे द्वीपीय देश की अहमियत?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। भारत और सेशेल्स अपने राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। ऐसे समय में जब हिंद महासागर में चीन अपनी आर्थिक और सामरिक मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है, सेशेल्स भारत के लिए एक भरोसेमंद समुद्री साझेदार के रूप में उभर रहा है। इसकी भौगोलिक स्थिति और विशाल समुद्री क्षेत्र इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं।
समुद्री व्यापार के केंद्र में है सेशेल्स
सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित 115 द्वीपों का समूह है, जिसकी भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बीच स्थापित करती है। पूर्वी अफ्रीका, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग इसके आसपास से गुजरते हैं। हर दिन कच्चा तेल, गैस, खाद्यान्न, तैयार माल और अन्य आवश्यक वस्तुओं से भरे हजारों जहाज इन मार्गों का उपयोग करते हैं। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा भारत सहित कई देशों की आर्थिक और सामरिक प्राथमिकता है।
छोटा देश, लेकिन विशाल समुद्री अधिकार क्षेत्र
भले ही सेशेल्स का भौगोलिक क्षेत्रफल और आबादी सीमित हो, लेकिन उसके पास 13 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) है। यह समुद्री क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, मत्स्य संपदा और समुद्री गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस विशाल क्षेत्र की निगरानी, समुद्री कानून लागू करना और पर्यावरण संरक्षण जैसी जिम्मेदारियां सेशेल्स के सामने बड़ी चुनौती हैं। भारत लंबे समय से रक्षा सहयोग, समुद्री निगरानी और क्षमता निर्माण के जरिए इस दिशा में सेशेल्स की मदद करता रहा है।
चीन की बढ़ती मौजूदगी ने बढ़ाई रणनीतिक अहमियत
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में बंदरगाहों, बुनियादी ढांचे और समुद्री संपर्क परियोजनाओं में तेजी से निवेश बढ़ाया है। इसके साथ ही चीनी नौसेना की गतिविधियां भी इस क्षेत्र में लगातार बढ़ी हैं। ऐसे बदलते सामरिक माहौल में सेशेल्स का महत्व और बढ़ गया है। भारत और सेशेल्स आधिकारिक तौर पर अपनी साझेदारी को किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं बताते, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग हिंद महासागर में शक्ति संतुलन बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
भारत की नीति- विकास और भरोसे पर जोर
भारत ने सेशेल्स के साथ अपने संबंधों को केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रखा है। नई दिल्ली ने विकास परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण के माध्यम से खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। भारत का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सहयोग बढ़ाना और दीर्घकालिक विश्वास कायम करना रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि विकास आधारित साझेदारी के रूप में भी मजबूत हुए हैं।
मोदी की यात्रा से क्या उम्मीदें हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, डिजिटल सहयोग, ब्लू इकोनॉमी और विकास परियोजनाओं से जुड़े कई अहम समझौतों पर प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही यह दौरा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) नीति को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेशेल्स के साथ मजबूत होते रिश्ते भारत की समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापारिक हितों और इंडो-पैसिफिक रणनीति को नई मजबूती प्रदान कर सकते हैं।