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अली असगर बोले- बदलते दौर के साथ बदली कॉमेडी, फिल्मी सितारों पर सबसे ज्यादा दबाव

कॉमेडियन और अभिनेता अली असगर का मानना है कि समय के साथ कॉमेडी का अंदाज भी पूरी तरह बदल गया है। उनका कहना है कि आज के दौर में दर्शकों का अटेंशन स्पैन पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे कलाकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कॉमेडी, सोशल मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री के दबाव और थिएटर की अहमियत पर खुलकर अपनी राय रखी।

बदलते समय के साथ बदल गई कॉमेडी

अली असगर ने कहा कि मनोरंजन की दुनिया लगातार बदल रही है और इसका असर कॉमेडी पर भी साफ दिखाई देता है। उनके मुताबिक, जिस तरह पहले लंबे समय तक चलने वाले कॉमेडी शो दर्शकों को पसंद आते थे, आज वैसा माहौल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि समय के साथ दर्शकों की पसंद और देखने का तरीका बदल गया है, इसलिए कलाकारों को भी नए प्रयोग करने पड़ रहे हैं। उनका मानना है कि हर दौर की अपनी अलग कॉमेडी होती है और उसी के अनुसार कंटेंट तैयार करना जरूरी है।

सोशल मीडिया ने बदला दर्शकों का देखने का तरीका

अली असगर का कहना है कि इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म ने दर्शकों के देखने की आदत बदल दी है। अब लोगों का ध्यान कुछ सेकंड तक ही किसी कंटेंट पर टिकता है। ऐसे में कलाकारों के लिए शुरुआत से ही दर्शकों को बांधे रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि यदि कंटेंट मजबूत नहीं होगा या प्रस्तुति प्रभावशाली नहीं होगी तो दर्शक तुरंत आगे बढ़ जाएंगे। यही वजह है कि आज अच्छी और साफ-सुथरी कॉमेडी तैयार करना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है।

फिल्मी कलाकारों पर सबसे ज्यादा दबाव

फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते दबाव पर अली असगर ने कहा कि हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है, लेकिन फिल्मों के कलाकारों पर सबसे अधिक जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, किसी फिल्म की रिलीज के साथ करोड़ों रुपये का निवेश जुड़ा होता है और उसकी सफलता या असफलता का असर सीधे कलाकारों पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि फिल्म एक टीमवर्क है, जिसमें निर्देशक, लेखक, तकनीकी टीम और कई विभाग शामिल होते हैं, लेकिन अक्सर फिल्म के न चलने का ठीकरा सिर्फ कलाकारों के सिर फोड़ दिया जाता है।

थिएटर कलाकार को बनाता है और मजबूत

अली असगर ने थिएटर को हर कलाकार के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि मंच पर अभिनय करने का अनुभव किसी भी कलाकार को आत्मविश्वास और अनुशासन सिखाता है। थिएटर में दर्शकों की प्रतिक्रिया तुरंत मिलती है, इसलिए कलाकार को हर पल सतर्क रहना पड़ता है। यहां दोबारा टेक लेने का मौका नहीं होता, जिससे अभिनय की क्षमता और मानसिक तैयारी दोनों मजबूत होती हैं। उन्होंने युवा कलाकारों से भी थिएटर से जुड़ने की अपील की।

अभिनय में निरंतर सीखना है सफलता की कुंजी

अली असगर का मानना है कि कलाकार को समय के साथ खुद को लगातार विकसित करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनोरंजन जगत में वही कलाकार लंबे समय तक टिकता है जो बदलते दर्शकों की पसंद को समझते हुए खुद को नए अंदाज में प्रस्तुत कर सके। उनके मुताबिक, सीखने की इच्छा, मेहनत और नए प्रयोग करने का साहस ही किसी कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखता है।

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