ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की ताकत का पाकिस्तानी पूर्व उच्चायुक्त ने माना लोहा, मुनीर को दी चेतावनी
भारत के रूसी मूल के अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त और वरिष्ठ राजनयिक अब्दुल बासित ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 का प्रभावी इस्तेमाल किया और पाकिस्तान के पास फिलहाल इस प्रणाली का समकक्ष जवाब मौजूद नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान की सेना मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सैन्य संघर्ष में अपनी बढ़त और भारतीय वायु रक्षा को नुकसान पहुंचाने के दावे करती रही है।
‘S-400 ने शानदार प्रदर्शन किया’
एक कार्यक्रम के दौरान भारत और पाकिस्तान की वायु रक्षा क्षमताओं पर चर्चा करते हुए अब्दुल बासित ने कहा कि भारत को रूस से मिली S-400 प्रणाली बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि भारत को शुरुआती तीन बैटरियां पहले ही मिल चुकी हैं, चौथी बैटरी की आपूर्ति जारी है और पांचवीं बैटरी भी वर्ष के अंत तक मिलने की उम्मीद है। बासित ने कहा कि करीब 5.4 अरब डॉलर के इस सौदे के तहत भारत अपनी हवाई सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रहा है। उनके अनुसार, मई 2025 के संघर्ष में S-400 का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा और इसी कारण भारत अतिरिक्त बैटरियों की खरीद पर भी विचार कर सकता है।
पाकिस्तानी दावों पर उठे सवाल
पाकिस्तानी सेना लगातार यह दावा करती रही है कि उसने मई 2025 के संघर्ष के दौरान भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली को भेद दिया था। हालांकि, अब्दुल बासित की टिप्पणी इन दावों से अलग तस्वीर पेश करती है। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान को अपनी वायु रक्षा क्षमताओं की समीक्षा करनी चाहिए और यह तय करना चाहिए कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उसे अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को कितना मजबूत करने की आवश्यकता है।
क्या है S-400 ट्रायम्फ की ताकत?
रूस द्वारा विकसित S-400 ट्रायम्फ दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में गिनी जाती है।
S-400 की प्रमुख विशेषताएं
- मारक क्षमता: 400 किलोमीटर तक
- रडार डिटेक्शन रेंज: लगभग 600 किलोमीटर
- निशाने: लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलें
- बहुस्तरीय सुरक्षा: एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम
2018 में हुआ था भारत-रूस समझौता
भारत और रूस के बीच 2018 में 5.43 अरब डॉलर का समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत को पांच S-400 सिस्टम मिलने हैं। यह प्रणाली अब भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क का अहम हिस्सा बन चुकी है और देश की सामरिक क्षमता को नई मजबूती प्रदान कर रही है।