अलवर थार हादसे में 7 महीने बाद मासूम खुशबू की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 5
अलवर के छठी मील क्षेत्र में नवंबर 2025 में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई 4 वर्षीय खुशबू ने करीब सात महीने तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया। मासूम की मौत के साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
सात महीने तक जिंदगी की जंग लड़ती रही खुशबू
परिजनों के अनुसार गुरुवार रात करीब 9 बजे खुशबू की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसकी सांस लेने में परेशानी बढ़ने लगी और कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया। परिजन तुरंत उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
2 नवंबर 2025 को हुआ था दर्दनाक हादसा
यह हादसा 2 नवंबर 2025 की शाम करीब साढ़े सात बजे अलवर के छठी मील क्षेत्र में हुआ था। नांगल खेड़ा निवासी महेंद्र अपने परिवार के साथ बाइक पर जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार थार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि परिवार के कई सदस्य मौके पर ही सड़क पर दूर-दूर जा गिरे।
मौके पर ही चली गई थीं चार जिंदगियां
हादसे में महेंद्र (35), उनकी पत्नी गुड्डी (35), दो वर्षीय बेटा पूर्वांश और आठ वर्षीय भतीजी पायल की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं महेंद्र की बेटी खुशबू गंभीर रूप से घायल हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि शव सड़क पर काफी दूर तक जा गिरे थे।
गंभीर चोटों के बाद हो गई थी पैरालाइज
हादसे के दौरान खुशबू उछलकर थार की छत पर जा गिरी थी। इससे उसके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। चिकित्सकीय उपचार के दौरान वह पैरालाइज हो गई थी। पिछले सात महीनों से उसका जयपुर में इलाज चल रहा था और परिवार उसकी जिंदगी बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा था।
आरोपी चालक हादसे के बाद फरार हो गया था
हादसे के बाद थार चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस ने मामले में जांच शुरू की थी। यह हादसा उस समय भी पूरे जिले में चर्चा का विषय बना था और लोगों ने तेज रफ्तार वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।
परिवार ने प्रशासन पर उठाए सवाल
परिवार के सदस्य चरण सिंह का कहना है कि इस हादसे में अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन पीड़ित परिवार को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद प्रशासन की ओर से कोई ठोस मदद या दीर्घकालिक राहत नहीं दी गई। परिवार अब भी आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है।
तीन बेटियों के भविष्य को लेकर चिंता
महेंद्र और गुड्डी की मौत के बाद परिवार की तीन बेटियां पूरी तरह बेसहारा हो गई हैं। परिजन उनके पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। खुशबू की मौत ने परिवार के दर्द को और गहरा कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता देने की आवश्यकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।