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India-Israel: ‘सूर्यास्त्र’ पर उठे सवाल, मेक इन इंडिया मॉडल पर छिड़ी बहस

‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारतीय सेना के लिए तैयार किए गए ‘सूर्यास्त्र’ यूनिवर्सल रॉकेट सिस्टम के परीक्षण के दौरान तकनीकी खामी सामने आई। इसके साथ ही यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या विदेशी तकनीक को भारत में असेंबल कर स्वदेशी उत्पाद के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों पर संबंधित कंपनियों या सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट सिस्टम को लेकर विवाद क्यों?

हाल में भारतीय सेना के लिए तैयार किए गए ‘सूर्यास्त्र’ यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को लेकर कई सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम बताए गए इस सिस्टम के एक परीक्षण के दौरान तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। दावा किया गया कि परीक्षण के दौरान रॉकेट निर्धारित क्षमता तक पहुंचने से पहले ही विफल हो गया। इस घटना के बाद रक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण और परीक्षण प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

विदेशी तकनीक को लेकर उठे सवाल

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ‘सूर्यास्त्र’ प्रणाली का मूल डिजाइन इजरायल की कंपनी एल्बिट सिस्टम्स से जुड़ा हुआ है और भारत में मुख्य रूप से इसके विभिन्न हिस्सों का एकीकरण किया गया है। पूर्व और वर्तमान सैन्य अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि इस प्रणाली में स्वदेशी तकनीक की भूमिका सीमित हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है और न ही संबंधित कंपनी की ओर से सार्वजनिक बयान जारी किया गया है।

रिकॉर्ड समय में हुई डिलीवरी पर भी चर्चा

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रक्षा प्रणाली की खरीद और डिलीवरी की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी की गई। बताया गया कि जनवरी 2026 में अनुबंध होने के बाद कुछ ही महीनों के भीतर परीक्षण और शुरुआती आपूर्ति का काम पूरा कर लिया गया। इतनी तेज प्रक्रिया को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि क्या सभी मानक परीक्षण और यूजर ट्रायल पूरी तरह से किए गए थे या नहीं।

परीक्षण के दौरान सामने आई तकनीकी खामी

सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि मई 2026 में हुए चार परीक्षणों में से एक के दौरान रॉकेट उड़ान के शुरुआती चरण में ही तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रॉकेट लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही टूट गया। इसके अलावा टेलीमेट्री डेटा और परीक्षण से जुड़ी तकनीकी जानकारी को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के सामने चुनौती

इस पूरे विवाद ने भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में चल रहे प्रयासों पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वदेशी अनुसंधान और बौद्धिक संपदा विकसित करने वाली कंपनियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिले, तो दीर्घकाल में घरेलू रक्षा उद्योग प्रभावित हो सकता है। ऐसे में पारदर्शिता, गुणवत्ता और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत माना जा रहा है।

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