US-Iran Deal: जिनेवा में होगी अमेरिका-ईरान शांति संधि पर साइनिंग, पाकिस्तान ने मेजबानी का किया दावा
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होंगे, लेकिन इस समारोह की मेजबानी पाकिस्तान करेगा। हालांकि, कार्यक्रम इस्लामाबाद के बजाय जिनेवा में आयोजित होने से पाकिस्तान की कूटनीतिक उम्मीदों को झटका माना जा रहा है।
19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित है हस्ताक्षर समारोह
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर 19 जून को जिनेवा में किए जाएंगे। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि पाकिस्तान इस कार्यक्रम की मेजबानी करेगा। प्रस्तावित समझौते में क्षेत्रीय तनाव कम करने, सैन्य कार्रवाई रोकने और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने की बात कही जा रही है।
इस्लामाबाद की बजाय जिनेवा चुने जाने से चर्चा तेज
पाकिस्तान ने पिछले कुछ महीनों में खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। इसी कारण इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि समझौते पर हस्ताक्षर उसके यहां होंगे। लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों ने तटस्थ स्थान के तौर पर स्विट्जरलैंड के जिनेवा को प्राथमिकता दी। इसे पाकिस्तान की अपेक्षाओं के लिहाज से एक झटका माना जा रहा है।
शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की भूमिका को बताया अहम
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि पिछले कई महीनों में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अमेरिका और ईरान के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और समझदारी दिखाने से शांति का रास्ता तैयार हुआ है।
संघर्ष विराम के श्रेय को लेकर उठ रहे सवाल
पाकिस्तान का दावा है कि उसने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने में योगदान दिया है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कतर की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, कतर के वरिष्ठ अधिकारी लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाए हुए थे। ऐसे में संघर्ष विराम और संभावित समझौते का श्रेय किसे मिलेगा, इस पर चर्चा जारी है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि पाकिस्तान की ओर से कई दावे किए गए हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान की तरफ से अभी तक इन सभी विवरणों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए प्रस्तावित समझौते और उससे जुड़े आयोजनों को लेकर अंतिम स्थिति पर वैश्विक नजर बनी हुई है।