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ग्वालियर की दो अनाथ बेटियों को मिला नया परिवार, स्वीडन और अमेरिका में संवारेंगी भविष्य

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से मानवता और ममता की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बाल देखभाल गृह में रह रही दो अनाथ बच्चियों को विदेशी परिवारों ने गोद लिया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक बच्ची को स्वीडन के दंपती और दूसरी दिव्यांग बच्ची को अमेरिका की एक महिला को सौंपा गया। अब दोनों बच्चियां नए परिवार के साथ विदेश में बेहतर जीवन और उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएंगी।

विदेशी परिवारों ने दिखाई संवेदनशीलता

अनाथ और बेसहारा बच्चों को परिवार देने की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विदेशी नागरिकों ने बच्चियों को गोद लेने में विशेष रुचि दिखाई। खास बात यह रही कि जिन बच्चों को अक्सर गोद लेने में प्राथमिकता नहीं मिलती, उनमें शामिल एक दिव्यांग बच्ची को भी अमेरिका की एक महिला ने अपनाया। यह निर्णय समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने वाला माना जा रहा है।

कानूनी प्रक्रिया के बाद सौंपी गई जिम्मेदारी

महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला अधिकारी उपासना राय ने बताया कि दोनों बच्चियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद गोद दिया गया है। गोद लेने की प्रक्रिया में सभी आवश्यक दस्तावेज, सत्यापन और बाल कल्याण से जुड़े नियमों का पालन किया गया। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर पारिवारिक वातावरण मिल सके।

दिव्यांग बच्ची को भी मिला परिवार का सहारा

गोद लेने के मामलों में आमतौर पर नवजात या स्वस्थ बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन इस मामले में एक दिव्यांग बच्ची को भी नया परिवार मिला है। अधिकारियों के अनुसार, यह उदाहरण दर्शाता है कि दुनिया के कई हिस्सों में लोग बच्चों की विशेष परिस्थितियों से अधिक उनके भविष्य और जीवन को महत्व दे रहे हैं। इससे ऐसे बच्चों के पुनर्वास की संभावनाएं भी बढ़ती हैं, जिन्हें अक्सर परिवार मिलने में कठिनाई होती है।

छोटे बच्चों को गोद लेने की रहती है अधिक मांग

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश दंपती नवजात से लेकर दो वर्ष तक की उम्र के बच्चों को गोद लेना पसंद करते हैं। ऐसे बच्चों को गोद लेने के लिए कई बार इच्छुक परिवारों को दो से तीन वर्ष तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं, छह वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को अपेक्षाकृत जल्दी गोद लिया जा सकता है। वर्तमान में ग्वालियर के बाल देखभाल गृहों में कई बच्चे अब भी परिवार मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

अनाथ बच्चों के लिए नई उम्मीद

इस गोद ग्रहण प्रक्रिया ने एक बार फिर यह साबित किया है कि दुनिया में ऐसे लोग मौजूद हैं जो अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को परिवार का प्यार देने के लिए आगे आते हैं। स्वीडन और अमेरिका जाने वाली ये दोनों बच्चियां अब नए माहौल में शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर अवसरों के साथ जीवन की नई शुरुआत करेंगी। यह पहल अन्य इच्छुक परिवारों को भी अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।

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