अंतिम संस्कार में लकड़ी को लेकर विवाद, चार भाइयों को 5-5 साल की सजा; अलवर कोर्ट का बड़ा फैसला
अलवर जिले की अदालत ने एक पुराने आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामला अंतिम संस्कार के दौरान लकड़ी ले जाने को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया था। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने एकजुट होकर जानलेवा हमला किया, जिसके चलते कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। फैसले को न्याय व्यवस्था की सख्ती और कानून के प्रति जवाबदेही का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
अंतिम संस्कार के दौरान शुरू हुआ विवाद
मामला 30 दिसंबर 2018 का है, जब मालाखेड़ा थाना क्षेत्र के निठारी गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। परिजन श्मशान के लिए लकड़ी लेने पहुंचे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोकते हुए विरोध जताया। शुरुआत में यह केवल कहासुनी तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद लोगों के बीच टकराव की स्थिति बन गई और मामला हिंसा में बदल गया।
लाठी-फर्सी से किया गया हमला
अभियोजन पक्ष के अनुसार विवाद के दौरान आरोपियों ने एक राय होकर मृतक पक्ष के लोगों पर हमला कर दिया। हमले में लाठी और फर्सी जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था। घायल व्यक्तियों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया और मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपियों की भूमिका अपराध में स्पष्ट रूप से साबित होती है। न्यायालय ने माना कि हमला पूर्व नियोजित न सही, लेकिन आरोपियों ने सामूहिक रूप से गंभीर हिंसा को अंजाम दिया, जिससे पीड़ित पक्ष को शारीरिक नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
चारों दोषियों को 5-5 साल का कठोर कारावास
अलवर जिला अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2 की अदालत ने पूर्णचंद के पुत्र हुकमचंद, राजू, रवि और विक्रम को दोषी मानते हुए प्रत्येक को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सामाजिक और पारिवारिक अवसरों पर होने वाली हिंसा को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता और कानून ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगा।