JEE Advanced 2026: नई चीजें सीखने की जिज्ञासा ने शुभम कुमार को बनाया देश का टॉपर
9वीं तक IIT के बारे में नहीं जानते थे शुभम, आज बने देश के नंबर-1 रैंक होल्डर
JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल करने वाले शुभम कुमार की सफलता की कहानी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है। बिहार के रहने वाले शुभम ने बताया कि बचपन से नई चीजें सीखने और समझने की आदत ने उन्हें पढ़ाई में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। खास बात यह है कि नौवीं कक्षा तक उन्हें IIT या JEE परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन लगातार मेहनत और सही रणनीति के दम पर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया।
जिज्ञासा ने खोला सफलता का रास्ता
शुभम कुमार का कहना है कि बचपन से ही उन्हें नई किताबें पढ़ने और नए विषयों को समझने का शौक था। यही आदत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य केवल टॉपर बनना नहीं था, बल्कि हर काम को बेहतर तरीके से करना था। इसी सोच ने उन्हें पढ़ाई में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि किसी भी विषय को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए पढ़ना चाहिए।
कोटा में पढ़ाई, लेकिन फोकस रहा आत्मविश्लेषण पर
कोटा में तैयारी के दौरान शुभम ने कोचिंग संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए अध्ययन सामग्री और कक्षा में पढ़ाए गए विषयों पर पूरा ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि केवल पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अपनी गलतियों को पहचानना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए उन्होंने हर टेस्ट के बाद उसका गहन विश्लेषण किया और कमजोरियों को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया। यही रणनीति उनकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बनी।
मॉक टेस्ट को बताया सफलता का सबसे बड़ा हथियार
भविष्य के अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए शुभम ने कहा कि सिलेबस पूरा होने के बाद अधिक से अधिक मॉक टेस्ट देने चाहिए। उनके अनुसार मॉक टेस्ट से परीक्षा का वास्तविक अनुभव मिलता है और समय प्रबंधन बेहतर होता है। साथ ही इससे अपनी कमजोरियों का पता चलता है, जिन्हें समय रहते सुधारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि JEE Main और JEE Advanced जैसी परीक्षाओं में सफलता के लिए मॉक टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बहन से मिली IIT की जानकारी
शुभम ने बताया कि नौवीं कक्षा तक उन्हें IIT या JEE के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनकी बड़ी बहन श्रेया कुमारी जब इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, तब पहली बार उन्हें इस क्षेत्र के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने दसवीं कक्षा से ही इस दिशा में गंभीरता से तैयारी शुरू कर दी। फिजिक्स और गणित में उनकी विशेष रुचि थी, जिसके कारण उन्होंने इन विषयों की अतिरिक्त किताबें पढ़नी शुरू कीं और अपनी बहन से भी लगातार मार्गदर्शन लिया।
परिवार का सहयोग बना सफलता की नींव
आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस की छात्रा उनकी बहन श्रेया कुमारी ने बताया कि शुभम बचपन से ही बेहद जिज्ञासु थे। उन्होंने केवल पढ़ाई में सहायता नहीं की, बल्कि उनकी सीखने की इच्छा को और मजबूत बनाने का प्रयास किया। श्रेया के अनुसार शुभम को फिजिक्स और गणित में विशेष रुचि थी, इसलिए उन्होंने शुरुआती स्तर पर ही उन्हें उच्च कक्षाओं के कॉन्सेप्ट समझाने शुरू कर दिए थे। यही मजबूत नींव आगे चलकर उनकी बड़ी सफलता का कारण बनी।
सफलता का संदेश: सीखने की भूख कभी खत्म न करें
शुभम कुमार की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि जिज्ञासा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से मिलती है। उन्होंने दिखाया कि यदि सीखने की इच्छा बनी रहे और मेहनत सही दिशा में की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। JEE Advanced 2026 में देश का टॉपर बनकर उन्होंने लाखों छात्रों को यह संदेश दिया है कि बड़ी सफलता का रास्ता छोटी-छोटी अच्छी आदतों से होकर गुजरता है।