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उमर ख़ालिद मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- “बेल है अधिकार”

लंबी कैद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Umar Khalid से जुड़े दिल्ली दंगा साजिश मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने ज़मानत को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक ट्रायल लंबित रहने की स्थिति में किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

‘बेल नियम है, जेल अपवाद’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने पुराने फैसले Union of India vs K.A. Najeeb का हवाला देते हुए दोहराया कि “बेल नियम है और जेल अपवाद।” अदालत ने कहा कि यह सिद्धांत Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) जैसे सख्त कानूनों में भी लागू होता है। कोर्ट के अनुसार यदि ट्रायल में असामान्य देरी हो रही है, तो आरोपी को ज़मानत देने पर विचार किया जाना चाहिए।

पहले के फैसलों पर भी जताई नाराज़गी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर ख़ालिद को ज़मानत न देने के दौरान पहले स्थापित न्यायिक सिद्धांतों का उचित पालन नहीं किया गया। अदालत ने 2024 के Gurvinder Singh vs Union of India फैसले पर भी असंतोष जताया और कहा कि निचली अदालतों व अन्य बेंचों को बड़ी बेंच के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

अंद्राबी केस का भी किया जिक्र

कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब उसने Syed Iftikhar Andrabi को ज़मानत दी। अंद्राबी करीब छह वर्षों से जेल में बंद थे। अदालत ने कहा कि बिना ट्रायल के लंबी कैद न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है और “न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर है।”

लिखित आदेश का इंतजार

हालांकि अदालत की विस्तृत लिखित टिप्पणी अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन मौखिक टिप्पणियों के बाद कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह टिप्पणी भविष्य में UAPA मामलों में ज़मानत को लेकर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

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