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कलक्टर के हस्तक्षेप से 4 दिन बाद FIR दर्ज, निगम ठेकेदार पर मारपीट व रिकॉर्ड छीनने का आरोप

नगर निगम में सहायक लेखाधिकारी (एएओ) के साथ अभद्रता, मारपीट और जबरन सरकारी रिकॉर्ड छीनने के मामले में चार दिन की देरी के बाद आखिरकार ठेकेदार प्रवीण चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। यह कार्रवाई जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला के हस्तक्षेप के बाद संभव हो सकी।

यह मामला 13 मई की शाम का बताया जा रहा है, आरोप के अनुसार ठेकेदार प्रवीण चौधरी नगर निगम कार्यालय पहुंचा और वहां मौजूद सहायक लेखाधिकारी हरीश चंद जैन से सरकारी फाइल छीनकर ले गया। विरोध करने पर उसने गाली-गलौज की, धक्का-मुक्की की और मारपीट की। घटना के दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी ने वीडियो भी बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

घटना के बाद कोतवाली थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन प्रारंभ में पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। पुलिस द्वारा सबूत के रूप में वीडियो फुटेज मांगे गए, जिन्हें पेन ड्राइव के माध्यम से उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बावजूद कुछ धाराएं लगाने से इनकार किए जाने पर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई।

इस मामले में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) और उससे जुड़े संगठनों ने इस मामले को लेकर बैठक की और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। साथ ही ठेकेदार के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी गई।

इसी बीच जिला कलक्टर के हस्तक्षेप के बाद रविवार को कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई। रिपोर्ट सहायक लेखाधिकारी हरीश चंद जैन की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें उन्होंने अपनी सुरक्षा की भी मांग की है।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच एएसआई अशोक कुमार को सौंपी गई है और आगे की कार्रवाई जारी है।

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