बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद CM चेहरे पर सस्पेंस, शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है। पार्टी ने चुनाव से पहले किसी चेहरे को आधिकारिक तौर पर सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया था, लेकिन दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई नाम तेजी से उभर रहे हैं। इनमें शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, हालांकि बीजेपी के पिछले फैसलों को देखते हुए पार्टी किसी नए चेहरे पर भी दांव खेल सकती है। अब सबकी नजरें पार्टी आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
ऐतिहासिक जीत के बाद बढ़ा सस्पेंस
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है। वहीं तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। इस जीत ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। हालांकि चुनाव खत्म होने के बाद भी मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पार्टी ने अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यही वजह है कि राजनीतिक चर्चाओं और संभावित दावेदारों को लेकर सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी सबसे मजबूत दावेदार?
राज्य की राजनीति में शुभेंदु अधिकारी को बीजेपी का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जा रहा है। नंदीग्राम से ममता बनर्जी को चुनौती देने के बाद उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है। संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में बीजेपी के विस्तार में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका बेहद अहम रही है, इसलिए पार्टी उन पर भरोसा जता सकती है।
बीजेपी का ‘सरप्राइज फेस’ फॉर्मूला भी चर्चा में
हालांकि बीजेपी की राजनीति को देखते हुए किसी नए चेहरे की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पार्टी ने चुनाव से पहले सीएम चेहरा घोषित नहीं किया था और बाद में अपेक्षा से अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी कारण बंगाल में भी अंतिम समय तक सस्पेंस बने रहने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व अक्सर संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला करता है।
अमित शाह के बयान ने बढ़ाई अटकलें
चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री बंगाल का ही होगा। यह बयान उस समय आया था जब तृणमूल कांग्रेस बीजेपी पर “बाहरी नेतृत्व” का आरोप लगा रही थी। अमित शाह के इस बयान के बाद स्थानीय नेताओं की दावेदारी को और बल मिला। अब पार्टी के भीतर क्षेत्रीय नेतृत्व और केंद्रीय रणनीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी सामने है।
कई नामों पर चल रही अंदरूनी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर कई नेताओं के नामों पर विचार किया जा रहा है। इनमें संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता, सांसद और अनुभवी चेहरे शामिल हैं। बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसा चेहरा चुनना होगा जो सरकार और संगठन दोनों को संतुलित तरीके से संभाल सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला ले सकती है।
अंतिम फैसला आलाकमान के हाथ में
फिलहाल मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अंतिम निर्णय बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। पार्टी की संसदीय बोर्ड बैठक और वरिष्ठ नेताओं के मंथन के बाद ही तस्वीर साफ होगी। बंगाल की जनता और राजनीतिक गलियारों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी शुभेंदु अधिकारी जैसे स्थापित चेहरे पर भरोसा करती है या फिर किसी नए चेहरे को सामने लाकर सबको चौंकाती है।