तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन: थलपति विजय की TVK ने 4 दिनों में जुटाया बहुमत
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार चार दिनों तक चली रणनीतिक बैठकों, समर्थन जुटाने की कवायद और सियासी उठापटक के बाद थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने आखिरकार बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को झटका देते हुए TVK ने सहयोगी दलों के समर्थन से सत्ता तक पहुंचने में सफलता पाई है।
बहुमत का आंकड़ा कैसे हुआ पूरा
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव परिणामों में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से दूर थी। विजय के दो सीटों से जीतने के कारण एक सीट छोड़ने पर संख्या 107 रहनी थी। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 112 तक पहुंचा, लेकिन फिर भी बहुमत से 6 सीटें कम थीं। अंततः अन्य दलों के समर्थन से यह कमी पूरी हो गई और TVK ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।
इन दलों ने दिया निर्णायक समर्थन
सरकार बनाने में क्षेत्रीय और वामपंथी दलों की भूमिका बेहद अहम रही। विदुथलाई चिरुथइगल काची (VCK) ने 2 सीटों के साथ समर्थन दिया, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) ने भी 2-2 सीटों के साथ TVK का साथ दिया। इन 6 विधायकों के जुड़ते ही विजय के नेतृत्व वाली पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंच गई। शुरुआत में नाराजगी के संकेत देने वाले दल भी अंततः सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते नजर आए।
कांग्रेस का शुरुआती समर्थन बना आधार
TVK के लिए सबसे पहले राहत कांग्रेस के समर्थन से मिली। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद कांग्रेस ने द्रमुक से दूरी बनाते हुए अपने 5 विधायकों के साथ विजय का साथ देने का फैसला किया। इससे विजय को शुरुआती मजबूती मिली और सरकार गठन की दिशा में पहला कदम मजबूत हुआ। हालांकि यह समर्थन पर्याप्त नहीं था, लेकिन इसने बाकी दलों को भी अपने रुख पर पुनर्विचार करने का संकेत दिया।
पर्दे के पीछे चली रणनीति और सियासी समीकरण
राजनीतिक अनिश्चितता के बीच कई तरह के समीकरण बनने की चर्चाएं भी तेज थीं। यह कयास लगाए जा रहे थे कि द्रमुक और एआईएडीएमके, विजय को रोकने के लिए साथ आ सकते हैं। इसी बीच राज्यपाल द्वारा सरकार गठन को लेकर देरी ने भी माहौल को और गर्माया। इन परिस्थितियों में विजय ने पर्दे के पीछे सक्रिय होकर छोटे दलों से संपर्क साधा और समर्थन जुटाने की रणनीति को तेज किया।
बैठकों और संवाद से बदला माहौल
VCK, CPI और CPIM जैसे दलों ने अपने-अपने स्तर पर बैठकों का आयोजन किया और राजनीतिक हालात का आकलन किया। शुरुआत में असहमति जताने वाले VCK ने भी अंततः समर्थन का फैसला लिया। वाम दलों ने संवैधानिक परंपरा का हवाला देते हुए सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का अवसर देने की बात कही। लगातार संवाद और राजनीतिक संतुलन ने अंततः विजय के पक्ष में माहौल बना दिया।
द्रविड़ राजनीति को बड़ा झटका, नए युग की शुरुआत
इस पूरे घटनाक्रम के साथ ही तमिलनाडु में दशकों से चली आ रही द्रविड़ राजनीति को बड़ा झटका लगा है। DMK और AIADMK जैसे पारंपरिक दलों के प्रभुत्व के बीच TVK का उभार एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। थलपति विजय की यह जीत सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत भी है, जो आने वाले समय में नए समीकरण गढ़ सकता है।