सरिस्का में शावक की अठखेलियां: वाटर हॉल में दिखा रोमांचक नजारा
राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में रविवार शाम एक बेहद मनमोहक दृश्य देखने को मिला, जब टाइग्रेस ST-19 का शावक वाटर हॉल में खेलता नजर आया। इस दुर्लभ साइटिंग ने पर्यटकों और वन अधिकारियों को रोमांचित कर दिया। लगातार बढ़ती बाघों की संख्या और सफल संरक्षण प्रयासों के बीच यह नजारा सरिस्का के बदलते वन्यजीव परिदृश्य की सकारात्मक तस्वीर पेश करता है।
वाटर हॉल में शावक की मस्ती ने जीता दिल
श्योदानपुरा क्षेत्र के जंगल में टाइग्रेस ST-19 का शावक पानी में उतरकर मस्ती करता दिखाई दिया। कभी डुबकी लगाना तो कभी किनारे पर उछलना—उसकी हरकतें किसी खेलते बच्चे जैसी लग रही थीं। पर्यटक इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते रहे और लंबे समय तक वहां रुके रहे। यह नजारा न केवल आकर्षक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित और सुरक्षित है, जहां वन्यजीव सहजता से अपनी प्राकृतिक गतिविधियां कर पा रहे हैं।
लाइव साइटिंग से पर्यटकों में उत्साह
इस दौरान सरिस्का दौरे पर पहुंचे वन राज्य मंत्री संजय शर्मा को भी यह दुर्लभ दृश्य देखने का मौका मिला। उनके साथ मौजूद अन्य पर्यटक भी इस अनुभव से खासे उत्साहित नजर आए। शावक की हर गतिविधि को लोग ध्यान से देखते रहे और इसे एक यादगार पल के रूप में संजो लिया। ऐसे मौके कम ही देखने को मिलते हैं, जब वन्यजीव इतने करीब और खुले तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
टाइगर फैमिली की मौजूदगी से बढ़ा आकर्षण
वन विभाग के अनुसार, टाइग्रेस ST-19 के चार शावक हैं और कई बार पूरा परिवार एक साथ देखा गया है। मां के साथ शावकों की मौजूदगी न सिर्फ पर्यटकों के लिए रोमांच बढ़ाती है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि क्षेत्र में बाघों का प्रजनन सफलतापूर्वक हो रहा है। जब एक ही स्थान पर कई बाघों की साइटिंग होती है, तो यह किसी भी वन्यजीव अभयारण्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
बढ़ती संख्या ने बदली सरिस्का की पहचान
सरिस्का टाइगर रिजर्व में अब बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बफर जोन में कई टाइगर सक्रिय हैं, जबकि पूरे क्षेत्र में इनकी संख्या 50 के पार पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि वन विभाग और सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। बेहतर निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और संरक्षण योजनाओं के कारण अब सरिस्का एक बार फिर बाघों के सुरक्षित आवास के रूप में उभर रहा है।
पुनर्स्थापन के बाद बदली तस्वीर
एक समय ऐसा था जब सरिस्का पूरी तरह बाघ विहीन हो गया था, लेकिन 2008 में शुरू किए गए पुनर्स्थापन कार्यक्रम ने हालात बदल दिए। दूसरे अभयारण्यों से बाघों को लाकर यहां बसाया गया और उनके संरक्षण के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई। आज वही सरिस्का फिर से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है, जहां बाघों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।