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भामाशाहों द्वारा पुस्तक भेंट से समृद्ध हुई पार्क लाइब्रेरी, अलवर में पढ़ने की नई संस्कृति का उभरता केंद्र

अलवर के बुद्ध विहार स्थित डी ब्लॉक में विकसित प्रदेश की पहली पार्क लाइब्रेरी अब ज्ञान और नवाचार का प्रतीक बनती जा रही है। जिला प्रशासन की इस पहल को नया बल तब मिला जब ‘अपना घर शालीमार’ के निदेशक अशोक सैनी ने देश भर के विख्यात लेखकों की 100 महत्वपूर्ण पुस्तकों का योगदान दिया। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह लाइब्रेरी युवाओं को आकर्षित कर रही है और शहर में पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

पार्क लाइब्रेरी: नवाचार से बनी पहचान

अलवर में जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई यह पार्क लाइब्रेरी प्रदेश में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसने आमजन का ध्यान आकर्षित किया है। बुद्ध विहार के डी ब्लॉक में स्थापित इस लाइब्रेरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लोग खुले वातावरण के साथ-साथ आरामदायक माहौल में अध्ययन कर सकें। वातानुकूलित सुविधा और सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था इसे और खास बनाती है। युवाओं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों और पुस्तक प्रेमियों के लिए यह स्थान तेजी से पसंदीदा बन रहा है, जिससे यह पहल एक सफल मॉडल के रूप में उभरती दिख रही है।

भामाशाह अशोक सैनी का योगदान: ज्ञान की ओर मजबूत कदम

‘अपना घर शालीमार’ के निदेशक अशोक सैनी द्वारा 100 महत्वपूर्ण पुस्तकों की भेंट इस लाइब्रेरी के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह पुस्तकें न केवल ज्ञानवर्धक हैं, बल्कि युवाओं को नई दिशा देने में भी सहायक होंगी। इस पहल से समाज में पुस्तक दान और शिक्षा सहयोग की भावना को भी बढ़ावा मिला है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के सहयोग से लाइब्रेरी का स्तर लगातार बेहतर होगा और यह शहर के बौद्धिक विकास का केंद्र बन सकेगी।

ख्यातनाम लेखकों की किताबों से बढ़ा आकर्षण

जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला के मार्गदर्शन में लाइब्रेरी में देश-विदेश के प्रसिद्ध लेखकों की किताबों को शामिल किया जा रहा है। संग्रह में कई ऐसी चर्चित और महंगी पुस्तकें भी जोड़ी गई हैं, जो पहले अलवर में आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। अमर्त्य सेन, अरुंधति राय, आर. के. नारायण, जवाहर लाल नेहरू और अरविंद अडिगा जैसे लेखकों की कृतियां यहां पाठकों को मिल रही हैं। इससे पाठकों को विविध विषयों पर अध्ययन का अवसर मिल रहा है और उनका दृष्टिकोण भी व्यापक हो रहा है।

निर्माण और लक्ष्य: आधुनिक लाइब्रेरी की ओर कदम

नगर विकास न्यास द्वारा इस पार्क लाइब्रेरी का निर्माण करीब 40 लाख रुपये की लागत से कराया गया है। सचिव स्नेहल धाय गुडे के नेतृत्व और तकनीकी टीम के सहयोग से इसे आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप तैयार किया गया है। एक्सईएन अशोक मदान ने भविष्य में इस लाइब्रेरी में लगभग 15 हजार पुस्तकों का संग्रह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। खास बात यह है कि इस लक्ष्य को पूरा करने में आमजन भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं, जिससे यह एक सामुदायिक पहल का रूप लेती जा रही है।

भविष्य की योजना: हर पार्क में लाइब्रेरी का सपना

इस अनोखी पहल को लेकर जिला प्रशासन को व्यापक सराहना मिल रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि यह मॉडल इसी तरह सफल रहता है, तो शहर के अन्य पार्कों में भी ऐसी लाइब्रेरियां स्थापित की जाएंगी। इससे न केवल पढ़ने की आदत को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को सकारात्मक दिशा भी मिलेगी। यह पहल अलवर को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने की ओर बढ़ता कदम साबित हो सकती है।

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