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4 महीने तक ‘मृत’ घोषित रहा बाहुबली, फिर जिंदा लौटकर मचा दी सनसनी – धनंजय सिंह का चौंकाने वाला किस्सा

उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत में चर्चित नाम धनंजय सिंह से जुड़ी एक घटना आज भी लोगों को हैरान करती है। 1998 में पुलिस मुठभेड़ में उनकी मौत की खबर फैली, लेकिन चार महीने बाद उनका जिंदा सामने आना पूरे प्रदेश के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। यह मामला न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उस दौर की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव के रिश्तों को भी उजागर करता है।

17 अक्टूबर 1998: मुठभेड़ और ‘मौत’ की खबर

अक्टूबर 1998 में भदोही-मिर्जापुर सीमा पर पुलिस को एक संभावित लूट की सूचना मिली, जिसके बाद घेराबंदी कर कार्रवाई की गई। मुठभेड़ में चार लोगों के मारे जाने का दावा किया गया और पुलिस ने उनमें एक को इनामी अपराधी धनंजय सिंह बताया। इस खबर ने तेजी से पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी फैला दी। मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस के आधिकारिक बयान के आधार पर आम जनता ने भी मान लिया कि बाहुबली नेता का अंत हो चुका है। उस समय इस कार्रवाई को बड़ी सफलता के रूप में पेश किया गया।

असलियत: जिंदा थे धनंजय सिंह

मुठभेड़ के बाद सामने आई सच्चाई ने पूरे घटनाक्रम को उलट दिया। जिस व्यक्ति को धनंजय सिंह बताया गया, वह दरअसल कोई और निकला। असली धनंजय सिंह इस दौरान जिंदा थे और पुलिस कार्रवाई से बचकर भूमिगत हो गए थे। यह मामला केवल पहचान की गलती नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही या संभावित साजिश के रूप में देखा गया। इस खुलासे ने पुलिस की जांच प्रणाली और मुठभेड़ों की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए।

चार महीने बाद वापसी से हड़कंप

करीब चार महीने तक सार्वजनिक जीवन से गायब रहने के बाद फरवरी 1999 में धनंजय सिंह अचानक जौनपुर में एक पुराने मामले में आत्मसमर्पण करने पहुंचे। कोर्ट में उनकी मौजूदगी ने हर किसी को चौंका दिया। जिस व्यक्ति को मृत घोषित किया जा चुका था, वह पूरी तरह स्वस्थ और जिंदा सामने था। इस घटना ने प्रशासन, मीडिया और आम जनता सभी को हिला कर रख दिया और राज्यभर में चर्चा का बड़ा विषय बन गई।

जांच और पुलिस पर कार्रवाई

घटना के उजागर होने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई। जांच में पाया गया कि मुठभेड़ में गंभीर खामियां थीं और पुलिस द्वारा की गई पहचान गलत थी। इस मामले में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उन पर हत्या व साजिश जैसे आरोप लगाए गए। इस घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था पर भरोसे को प्रभावित किया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ दी।

राजनीति में फिर मजबूत वापसी

इस विवादित घटना के बावजूद धनंजय सिंह ने अपने राजनीतिक करियर को जारी रखा। वे पूर्वांचल की राजनीति में सक्रिय बने रहे और बाद में विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचे। बाहुबली छवि और विवादों के बावजूद उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर नहीं पड़ी। यह घटना आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक उदाहरण के तौर पर याद की जाती है, जो बताती है कि किस तरह अपराध, राजनीति और सत्ता का जटिल संबंध काम करता है।

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