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दिल्ली में जनगणना 2026 की शुरुआत: अब घर-घर पहुंचेगी डिजिटल टीम, 33 सवालों से तैयार होगा विकास का नया खाका

देश की राजधानी दिल्ली में जनगणना 2026 का पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन’ 16 अप्रैल से शुरू हो गया है। इस बार प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे डेटा संग्रह पहले से ज्यादा तेज और पारदर्शी बनेगा। अधिकारियों की टीमें घर-घर जाकर 33 अहम सवाल पूछेंगी, जो मकान, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े हैं। यह जानकारी भविष्य की सरकारी योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण की नींव बनेगी।

डिजिटल जनगणना की शुरुआत: प्रक्रिया हुई आसान और पारदर्शी

जनगणना 2026 को इस बार आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होगी। अधिकारी टैब या मोबाइल डिवाइस के जरिए सीधे डेटा दर्ज करेंगे, जिससे गलतियों की संभावना कम होगी। नागरिकों को भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद भरने का विकल्प दिया गया है। रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाला 16 अंकों का यूनिक कोड डेटा की सत्यापन प्रक्रिया को आसान बनाएगा। यह बदलाव न केवल समय बचाएगा, बल्कि पारदर्शिता को भी मजबूत करेगा।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया

जनगणना इस बार दो चरणों में आयोजित की जा रही है। पहला चरण 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगा, जिसमें नई दिल्ली नगर पालिका परिषद और दिल्ली कैंट क्षेत्र शामिल हैं। इसके बाद दूसरा चरण 16 मई से 15 जून तक होगा, जिसमें दिल्ली नगर निगम के सभी इलाकों को कवर किया जाएगा। पहले चरण में घरों और उनकी सुविधाओं का विवरण जुटाया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती और व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी।

घर-घर पहुंचकर पूछे जाएंगे 33 अहम सवाल

गणनाकर्मी घर-घर जाकर करीब 33 सवाल पूछेंगे, जो मकान की संरचना, परिवार की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित होंगे। इनमें घर के निर्माण सामग्री, पानी-बिजली की उपलब्धता, शौचालय, रसोई, गैस कनेक्शन, इंटरनेट, वाहन और अन्य सुविधाओं से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया की जानकारी और सामाजिक वर्ग से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। ये सभी प्रश्न सरकार को जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करेंगे।

ऑनलाइन स्वयं जानकारी भरने की सुविधा

सरकार ने इस बार नागरिकों को स्व-घोषणा (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया है। लोग आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। फॉर्म भरने के बाद उन्हें एक यूनिक कोड मिलेगा, जिसे गणनाकर्मी सत्यापन के दौरान इस्तेमाल करेंगे। यदि किसी जानकारी में गलती होती है, तो उसे सुधारा भी जा सकता है। यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो समय की कमी या अन्य कारणों से घर पर उपलब्ध नहीं रहते।

सही जानकारी देना जरूरी,

गलत पर हो सकती है कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गणनाकर्मी केवल निर्धारित सवाल ही पूछ सकते हैं। यदि कोई अधिकारी अनावश्यक या गलत प्रश्न करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं नागरिकों के लिए भी सही और सटीक जानकारी देना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इस सख्ती का उद्देश्य डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखना है, ताकि भविष्य की योजनाएं सही आधार पर तैयार की जा सकें।

विकास योजनाओं की नींव बनेगी जनगणना

जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की आधारशिला होती है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं तैयार करती है। दिल्ली में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले वर्षों की नीतियों को दिशा देगा और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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