पुष्कर की माहेश्वरी धर्मशाला में संत की मौजूदगी में विवाद: लोकार्पण समारोह के दौरान मारपीट से समाज में उबाल
राजस्थान के पुष्कर में माहेश्वरी धर्मशाला परिसर में 15 अप्रैल को आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब राष्ट्रीय संत गोविन्द गिरी महाराज की मौजूदगी में समाज के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हो गई। कृष्ण भवन के लोकार्पण समारोह के दौरान हुई इस घटना ने माहेश्वरी समाज की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और संस्था के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद को और गहरा कर दिया है।
लोकार्पण समारोह में बिगड़ा माहौल
पुष्कर स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में नवनिर्मित कृष्ण भवन के लोकार्पण के लिए संत गोविन्द गिरी महाराज पहुंचे थे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न पदाधिकारी, सदस्य और आमजन मौजूद थे। स्वागत समारोह शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ, लेकिन जैसे ही विरोधी गुट के लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए, माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और फिर मारपीट में बदल गई। इस दौरान कई लोगों को चोटें भी आईं, जिससे समारोह की गरिमा प्रभावित हुई।
नेतृत्व विवाद बना टकराव की वजह
माहेश्वरी समाज के भीतर अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विरोधी गुट का आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद वे पद पर बने हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर पहले से असंतोष था, जो समारोह के दौरान सामने आ गया। विरोधी पक्ष का कहना है कि संस्था में नए चुनाव कराए जाने चाहिए ताकि लोकतांत्रिक तरीके से नेतृत्व तय हो सके और समाज में एकता कायम रहे।
मारपीट के गंभीर आरोप और प्रतिक्रिया
घटना के बाद पूर्व पदाधिकारियों और विरोधी गुट के नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में बाहरी तत्वों को बुलाया गया, जिन्होंने जानबूझकर हिंसा की। उनका कहना है कि यह केवल आपसी विवाद नहीं बल्कि सुनियोजित हमला था। वहीं, कुछ पदाधिकारियों को जमीन पर गिराकर पीटे जाने की बात भी सामने आई है। इस घटना को लेकर समाज के वरिष्ठ लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, खासकर तब जब एक संत कार्यक्रम में उपस्थित थे।
लगातार इस्तीफों से बढ़ा दबाव
घटना से पहले ही संस्था की कार्यकारिणी में असंतोष के संकेत मिल चुके थे। कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हाल ही में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिससे संगठन की आंतरिक स्थिति कमजोर हुई। इन इस्तीफों को भी वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। समाज के एक बड़े वर्ग का मानना है कि जब तक नया नेतृत्व नहीं चुना जाएगा, तब तक विवाद और टकराव की स्थिति बनी रहेगी।
अध्यक्ष का पक्ष और चुनाव का संकेत
विवाद के बीच अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा ने मारपीट की घटना पर दुख जताया है। उनका कहना है कि वे कार्यक्रम के दौरान संत के साथ व्यस्त थे, इसलिए उन्हें तत्काल स्थिति की जानकारी नहीं मिल पाई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही नए चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। भूतड़ा ने साफ किया कि वे किसी भी तरह के विवादित माहौल में पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं और संगठन की एकता उनके लिए प्राथमिकता है।
समाज की छवि पर असर और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम ने माहेश्वरी समाज की छवि को प्रभावित किया है, जो आमतौर पर अपनी एकजुटता और अनुशासन के लिए जाना जाता है। धार्मिक और सामाजिक मंच पर इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संस्था नेतृत्व विवाद को कैसे सुलझाया जाएगा और क्या आगामी चुनाव समाज में स्थिरता और विश्वास बहाल कर पाएंगे।