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रामगढ़ तहसील भवन का जर्जर हिस्सा बना खतरा

Ramgarh में पुराने तहसील भवन का जर्जर हिस्सा अब भी खड़ा है, जो कभी भी गिर सकता है। तीन महीने पहले ध्वस्तीकरण शुरू होने के बावजूद अधूरा काम लोगों के लिए जानलेवा खतरा बन गया है।

अधूरा ध्वस्तीकरण बना जोखिम
पीडब्ल्यूडी द्वारा करीब तीन महीने पहले पुराने तहसील भवन का अधिकांश हिस्सा तोड़ दिया गया था, लेकिन एक कमरानुमा जर्जर हिस्सा अब भी खड़ा है। यह हिस्सा बेहद कमजोर स्थिति में है और कभी भी ढह सकता है। स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं का कहना है कि अधूरा ध्वस्तीकरण ही सबसे बड़ी चिंता का कारण बन गया है।

अधिवक्ताओं और आमजन की जान खतरे में
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इस खतरनाक हिस्से के पास रोजाना अधिवक्ता और उनके मुवक्किल बैठते हैं। छत और दीवारों से लगातार चूना और पत्थर गिर रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बरसात के मौसम में नमी बढ़ने से दीवारों की पकड़ और कमजोर हो रही है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

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बार एसोसिएशन ने उठाई आवाज
बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने कई बार प्रशासन और पीडब्ल्यूडी से मांग की है कि बचे हुए हिस्से को भी जल्द ध्वस्त किया जाए। उनका कहना है कि कमरे में रखा तहसील का सामान हटाने में देरी के कारण काम अटका हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

पहले भी हो चुका है हादसा
करीब डेढ़ साल पहले तहसीलदार के चैंबर में छत का हिस्सा गिर चुका है, जिससे बड़ा हादसा टल गया था। इसके बाद जांच में भवन को कंडम घोषित किया गया था। बावजूद इसके अब तक पूरी तरह ध्वस्तीकरण नहीं हो पाया है, जो प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

नई इमारत और योजना अटकी
नई तहसील भवन के लिए बजट स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। मिनी सचिवालय योजना के चलते पूरा प्रोजेक्ट अटक गया है। न तो नई बिल्डिंग बन पाई है और न ही पुरानी को पूरी तरह हटाया गया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

पीडब्ल्यूडी ने बताई देरी की वजह
पीडब्ल्यूडी की ओर से बताया गया है कि ठेकेदार का भुगतान लंबित है और भवन में रखा सामान भी कार्य में बाधा बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उच्च स्तर से निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल लोग इसी असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।

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