दिल्ली की अदालत में रॉबर्ट वाड्रा केस पर बड़ा अपडेट, 15 अप्रैल को आएगा अहम फैसला
राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने चर्चित शिकोहपुर गुरुग्राम लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के सवाल पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत 15 अप्रैल को अपना अहम निर्णय सुनाएगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
कोर्ट में क्या हुआ, क्यों टला फैसला?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों की बातों पर गौर करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत अब यह तय करेगी कि ED द्वारा दायर अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं से मुकदमे की औपचारिक सुनवाई आगे बढ़ती है या नहीं, इसका रास्ता तय होता है।
किन आरोपियों पर है मामला?
इस केस में रॉबर्ट वाड्रा समेत कुल 11 व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के अलावा सत्यनंद यादव और केवल सिंह विरक जैसे नाम भी शामिल हैं। ED ने 17 जुलाई 2025 को इस पूरे मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस लैंड डील में कई अनियमितताएं हुईं और नियमों को दरकिनार कर फायदा उठाया गया।
शिकोहपुर लैंड डील का पूरा मामला क्या है?
यह विवाद गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव (सेक्टर-83) में स्थित 3.53 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने 12 फरवरी 2008 को इस जमीन को खरीदा और बाद में कथित तौर पर गलत दस्तावेजों और भ्रामक घोषणाओं के आधार पर वाणिज्यिक लाइसेंस हासिल किया। इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन और प्रभाव का दुरुपयोग किए जाने के आरोप लगाए गए हैं, जिसकी जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से की जा रही है।
ED की कार्रवाई: संपत्तियों की जब्ती
जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने 16 जुलाई 2025 को बड़ी कार्रवाई करते हुए 43 संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 37.64 करोड़ रुपये बताई गई है। एजेंसी का मानना है कि ये संपत्तियां कथित अवैध लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी हो सकती हैं। इस कार्रवाई ने मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है और कानूनी प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले में अगला अहम पड़ाव 15 अप्रैल है, जब अदालत यह तय करेगी कि ED की चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। इसके अलावा कुछ अन्य आरोपियों की सुनवाई के लिए अदालत ने अलग तारीख भी तय की है। इस फैसले के बाद ही साफ होगा कि मामला ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा या नहीं। राजनीतिक और कानूनी नजरिए से यह केस काफी संवेदनशील माना जा रहा है।