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जोबनेर में अनोखा विवाह: दिव्यांग बेटी ने भगवान श्रीकृष्ण को बनाया जीवनसाथी, भक्ति में दिखी मीरा की झलक

जयपुर जिले के जोबनेर कस्बे में आस्था और भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जहां 21 वर्षीय दिव्यांग युवती तमन्ना कंवर ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ विधि-विधान से विवाह किया। वृंदावन से लाई गई सुहाग सामग्री और स्वर्ण जड़ित प्रतिमा के साथ सात फेरे लेकर यह अनोखा विवाह संपन्न हुआ। इस भावुक पल ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया और लोगों को मीराबाई की भक्ति की याद दिला दी।

भक्ति का अद्भुत रूप: जब भगवान बने दूल्हे

जोबनेर में संपन्न हुआ यह विवाह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गहरी आस्था का प्रतीक बन गया। दिव्यांग तमन्ना कंवर ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना जीवनसाथी मानते हुए उनके साथ पूरे रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। परिवार द्वारा चांदी की प्रतिमा पर स्वर्ण लेप करवाकर उसे दूल्हे के रूप में स्थापित किया गया। विवाह की हर रस्म पारंपरिक हिंदू रीति से निभाई गई, जिसमें गांव के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अनोखे आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया और भक्ति की मिसाल पेश की।

मां का संकल्प बना बेटी का सहारा

तमन्ना की मां डॉ. मंजू कंवर ने बेटी की परवरिश में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने वर्षों पहले अपनी पढ़ाई छोड़कर बेटी की देखभाल की और बाद में पीएचडी पूरी की। बेटी की शादी को लेकर मन में चिंता के बीच एक दिन उन्हें विचार आया कि क्यों न भगवान को ही दामाद बनाया जाए। परिवार ने इस विचार को ईश्वरीय प्रेरणा मानकर स्वीकार किया। यह निर्णय न केवल बेटी के जीवन को एक नई दिशा देने वाला बना, बल्कि समाज के सामने भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर गया।

बचपन से भक्ति में लीन रही तमन्ना

परिजनों के अनुसार तमन्ना कंवर बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति की रही है। वह नियमित रूप से व्रत-उपवास रखती है और पूजा-पाठ में गहरी आस्था रखती है। एकादशी, गुरुवार और पुरुषोत्तम मास के व्रत वह पूरे नियम और श्रद्धा से निभाती रही है। उसकी इस भक्ति ने ही परिवार को यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस बेटी को पहले लोग दया की दृष्टि से देखते थे, आज वही भक्ति और आस्था की मिसाल बनकर उभरी है।

वृंदावन से जुड़ी आस्था की कड़ी

विवाह से पहले परिवार तमन्ना को वृंदावन ले गया, जहां उन्होंने संतों के दर्शन किए और पवित्र स्थलों का भ्रमण किया। भांडीर वन जैसे धार्मिक स्थल से सुहाग सामग्री लाई गई, जहां मान्यता है कि राधा-कृष्ण का विवाह संपन्न हुआ था। वहीं के मंदिर से सिंदूर और अन्य पूजन सामग्री लाकर इस विवाह को और भी विशेष बनाया गया। इस धार्मिक यात्रा ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया और भक्ति की भावना को और गहरा कर दिया।

पूरे गांव ने निभाई सहभागिता

इस अनूठे विवाह में जोबनेर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग शामिल हुए। करीब 400 निमंत्रण पत्र बांटे गए थे और लगभग 2000 लोगों ने विवाह समारोह में भाग लिया। पिले चावल, हल्दी, मेहंदी, महिला संगीत से लेकर बारात और विदाई तक सभी रस्में पूरे उत्साह के साथ निभाई गईं। ज्वाला पोल स्थित मंदिर से बारात निकाली गई, जिसने इस आयोजन को और भव्य बना दिया। यह विवाह अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

आस्था की मिसाल बना जोबनेर का यह विवाह

तमन्ना कंवर और भगवान श्रीकृष्ण का यह विवाह आने वाले समय में एक अनूठी मिसाल के रूप में याद किया जाएगा। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि सच्ची आस्था और विश्वास के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है। गांव के लोगों के लिए यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और सकारात्मक सोच का उत्सव था। यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि हर व्यक्ति का जीवन सम्मान और खुशियों के साथ जीने का अधिकार रखता है।

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