राजस्थान SI भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ओवरएज अभ्यर्थियों की राहत सीमित, परीक्षा तय समय पर ही होगी
राजस्थान पुलिस उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए ओवरएज अभ्यर्थियों को दी गई राहत को सीमित कर दिया है। अब केवल याचिकाकर्ताओं को ही परीक्षा में शामिल होने की अनुमति होगी, जबकि परीक्षा कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना रुख, सीमित की राहत
सुप्रीम कोर्ट की विशेष अवकाश पीठ ने 2 अप्रैल 2026 के अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि ओवरएज अभ्यर्थियों को दी गई छूट का दायरा व्यापक नहीं होगा। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने राजस्थान लोक सेवा आयोग की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि पहले आदेश की गलत व्याख्या हो रही थी। अदालत ने साफ किया कि सभी ओवरएज अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती, बल्कि यह राहत केवल सीमित दायरे में ही लागू रहेगी।
सिर्फ याचिकाकर्ता को ही मिलेगी परीक्षा में बैठने की अनुमति
अदालत ने अपने संशोधित आदेश में विशेष रूप से कहा कि केवल याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा को ही परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। इससे पहले यह माना जा रहा था कि सभी ओवरएज अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, लेकिन कोर्ट ने इस भ्रम को दूर कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन्होंने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है, उन्हें इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा। इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता आई है।
परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी आयोजित
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राजस्थान पुलिस SI भर्ती परीक्षा अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएगी। 5 और 6 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होने वाली परीक्षा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। अदालत ने आयोग को स्पष्ट रूप से कहा कि परीक्षा शेड्यूल में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इससे लाखों अभ्यर्थियों के बीच बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है और परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को राहत मिली है।
RPSC ने बताई प्रशासनिक चुनौतियां
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने कोर्ट को बताया कि पूर्व आदेश के कारण उन्हें कई प्रशासनिक और व्यवस्थागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। आयोग के अनुसार, करीब 713 ओवरएज अभ्यर्थियों को पहले ही प्रवेश पत्र जारी किए जा चुके हैं। ऐसे में अंतिम समय में बड़ी संख्या में अतिरिक्त अभ्यर्थियों को शामिल करना संभव नहीं था। इससे परीक्षा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रों की क्षमता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था।
भर्ती प्रक्रिया का विशाल स्तर, व्यवस्था पर पड़ता असर
आयोग ने यह भी जानकारी दी कि इस भर्ती प्रक्रिया में लगभग 7.7 लाख अभ्यर्थी शामिल हैं और परीक्षा 41 शहरों में 1173 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। इतने बड़े स्तर पर किसी भी प्रकार का अचानक बदलाव पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। आयोग ने कोर्ट के सामने यह तर्क रखा कि परीक्षा की निष्पक्षता और संचालन को बनाए रखने के लिए सीमित और स्पष्ट निर्णय जरूरी है।
परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय परीक्षा की पारदर्शिता और प्रशासनिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। ओवरएज अभ्यर्थियों को राहत देते समय भी कोर्ट ने संतुलन बनाए रखा है, ताकि पूरी प्रक्रिया प्रभावित न हो। इस निर्णय से भर्ती परीक्षा की विश्वसनीयता बनी रहेगी और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट उदाहरण भी स्थापित होगा।