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गहलोत पर राठौड़ का तंज, महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस घिरी—संगठन मजबूती का भी ऐलान

राजस्थान की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस नेता अशोक गहलोत पर तीखा कटाक्ष करते हुए उन्हें “इंतजार शास्त्र” चलाने वाला बताया। साथ ही महिला आरक्षण बिल, एनएसयूआई के विरोध और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए। राठौड़ ने साफ संकेत दिए कि भाजपा अब संगठन को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम करेगी।

गहलोत पर सीधा हमला: “इंतजार शास्त्र” पर तंज

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि वे फिलहाल सक्रिय राजनीति में खाली समय बिताते नजर आ रहे हैं और “इंतजार शास्त्र” के जरिए मुद्दों को हवा दे रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि हर मुद्दे में राजनीतिक लाभ तलाशना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उम्र के साथ संतुलन और भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी होता है। उनके अनुसार, गहलोत के हालिया बयान इसी संतुलन से दूर दिखाई देते हैं, जिससे राजनीतिक संवाद का स्तर प्रभावित हो रहा है।

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस से सवाल

महिला आरक्षण बिल को लेकर राठौड़ ने कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह बिल लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ, फिर भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा सवाल उठाना समझ से परे है। राठौड़ ने इसे “अनावश्यक राजनीति” बताते हुए कहा कि अगर कोई आपत्ति है तो उसे स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से यह भी पूछा कि महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे पर भ्रम पैदा करने से आखिर किसे लाभ मिलेगा, और क्या यह रुख महिलाओं के हितों के अनुरूप है।

एनएसयूआई विरोध पर भाजपा का पलटवार

विश्वविद्यालयों में महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को लेकर हुए विरोध पर भी राठौड़ ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य समाज में जागरूकता और बराबरी का संदेश देना है, लेकिन एनएसयूआई का विरोध समझ से परे है। राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि अगर यही कार्यक्रम कांग्रेस से जुड़े किसी नेता द्वारा आयोजित होता, तो उसकी सराहना की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब जमीनी मुद्दों से दूर होकर केवल बयानबाज़ी और सोशल मीडिया तक सीमित होती जा रही है।

कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष, संगठन पर जोर

राठौड़ ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर भी निशाना साधा और कहा कि पार्टी के कई नेता आपसी प्रतिस्पर्धा में उलझे हुए हैं। उन्होंने गोविंद सिंह डोटासरा और अन्य नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह “बयान और ट्वीट की राजनीति” बनकर रह गई है। राठौड़ ने दावा किया कि कांग्रेस को परिवारवाद से बाहर निकलना होगा, तभी वह जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता फिर से हासिल कर पाएगी। उन्होंने भाजपा को एक संगठित और सक्रिय विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।

भाजपा की रणनीति: संगठन मजबूती पर फोकस

आगे की रणनीति पर बात करते हुए मदन राठौड़ ने बताया कि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 6 अप्रैल को प्रदेश प्रभारी के दौरे के बाद 7 अप्रैल को सीकर में महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को एकजुट करना, चुनावी तैयारियों को धार देना और संगठनात्मक ढांचे को और सशक्त बनाना है। राठौड़ ने कहा कि भाजपा जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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