ईरान युद्ध का वैश्विक असर: पाकिस्तान में पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये लीटर, बढ़ती महंगाई से हालात बिगड़े
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। सबसे ज्यादा दबाव पाकिस्तान पर देखने को मिल रहा है, जहां ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने से आम जनता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सरकार ने राहत के कुछ कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई ने हालात को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
ईंधन कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
पाकिस्तान में सरकार ने 2 अप्रैल को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया। डीजल की कीमत करीब 54.9 प्रतिशत बढ़कर 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई, जबकि पेट्रोल 42.7 प्रतिशत महंगा होकर 458.41 रुपये प्रति लीटर हो गया। नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गईं। इस बढ़ोतरी ने ट्रांसपोर्ट से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई का दबाव और तेज हो गया है।
वैश्विक तेल संकट बना मुख्य वजह
सरकार के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस फैसले की मुख्य वजह है। ईरान से जुड़े तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे तेल की उपलब्धता कम हुई और कीमतें तेजी से बढ़ीं। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के चलते पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए हालात और मुश्किल हो गए हैं, जहां विदेशी मुद्रा संकट पहले से ही गहराया हुआ है।
आम जनता के लिए सीमित राहत योजना
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने दोपहिया वाहन चालकों को राहत देने के लिए सब्सिडी की घोषणा की है। इसके तहत तीन महीने तक प्रति लीटर 100 रुपये की राहत दी जाएगी, लेकिन यह सुविधा अधिकतम 20 लीटर प्रति माह तक ही सीमित रहेगी। इसके अलावा छोटे किसानों को समर्थन देने के लिए प्रति एकड़ 1500 रुपये की एकमुश्त सहायता का ऐलान किया गया है, ताकि कृषि क्षेत्र पर बढ़ते खर्च का कुछ बोझ कम किया जा सके।
पहले भी बढ़ चुके थे दाम, बढ़ी चिंता
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में ईंधन महंगा हुआ हो। पिछले महीने भी सरकार ने करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। लगातार बढ़ती कीमतों से महंगाई दर में और इजाफा होने की आशंका है। खाद्य पदार्थों, परिवहन और बिजली जैसी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, जिससे आम लोगों का बजट पूरी तरह बिगड़ता जा रहा है।
टोल और परिवहन लागत में भी इजाफा
ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हाईवे टोल दरों और परिवहन लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। पाकिस्तान की तेल आपूर्ति मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है, जो खाड़ी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। ऐसे में वैश्विक तनाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और परिवहन महंगा होने से हर वस्तु की कीमत बढ़ जाती है।