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सारिस्का के पांडुपोल में उमड़ा आस्था का सैलाब, हनुमान जन्मोत्सव पर गूंजे जयकारे

अलवर के सरिस्का अभयारण्य की सुरम्य वादियों में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर बजरंगबली के दर्शन किए और अपनी मनोकामनाएं अर्पित कीं। पूरे मंदिर परिसर को फूल-मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया, जहां बाबा का विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।

इस मंदिर की सबसे खास बात यहां विराजमान हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा है, जो देशभर में अपनी अनोखी पहचान रखती है। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। दिनभर सुंदरकांड पाठ, पूजा-अर्चना, हवन-यज्ञ और भंडारे का आयोजन चलता रहा। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर माहौल में “जय श्री राम” और “बजरंगबली की जय” के जयघोष गूंजते रहे।

मंदिर के पुजारी पंडित मुरारी लाल शर्मा और ललित मोहन के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी जन्मोत्सव को बड़े हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। राजस्थान के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे, जिससे पूरे क्षेत्र में मेले जैसा वातावरण बन गया।

पौराणिक मान्यता और किंवदंती
पांडुपोल हनुमान मंदिर का संबंध भीम और पांडवों का अज्ञातवास से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा से माना जाता है। मान्यता के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र से गुजर रहे थे। रास्ते में एक वानर लेटा हुआ था, जिसने मार्ग अवरुद्ध कर रखा था।

भीम, जो अपनी अपार शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे, उन्होंने वानर से रास्ता छोड़ने को कहा। लेकिन वानर ने शांत स्वर में भीम से अपनी पूंछ हटाने को कहा। भीम ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन वे वानर की पूंछ तक को नहीं हिला सके। तब उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं, बल्कि स्वयं हनुमान हैं। इस घटना के बाद हनुमान जी ने भीम का अहंकार तोड़ा और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी वजह से यहां हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा स्थापित है, जो इस कथा की सजीव याद दिलाती है।

आस्था और परंपरा

इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त “सवा मनी” का भंडारा करवाते हैं, जो यहां की प्रमुख परंपरा मानी जाती है।

सारिस्का की हरियाली और पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम भी प्रस्तुत करता है। हनुमान जन्मोत्सव के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पांडुपोल हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का अटूट केंद्र बना हुआ है।

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