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डिमोना पर मिसाइल हमला: 47 घायल, हालात तनावपूर्ण

इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है। हाल ही में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए इजरायल के डिमोना और अराद शहरों को निशाना बनाया। इस हमले में 47 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। इजरायली सेना इजरायल डिफेंस फोर्सेस ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह एक गंभीर सुरक्षा चुनौती है। हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

परमाणु ठिकानों पर बढ़ता खतरा, वैश्विक चिंता गहराई

डिमोना शहर इजरायल के बेहद संवेदनशील परमाणु अनुसंधान केंद्र के लिए जाना जाता है, ऐसे में इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले इजरायल ने नतांज स्थित ईरान के परमाणु केंद्र पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसके बाद यह हमला पलटवार के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने दोनों घटनाओं पर नजर बनाए रखते हुए जांच शुरू कर दी है। फिलहाल कहीं भी रेडिएशन लीक की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

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बच्चों समेत कई लोग घायल, मानसिक आघात के मामले भी बढ़े

हमले में एक 12 वर्षीय बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है, जो मिसाइल के टुकड़ों की चपेट में आ गया। इसके अलावा एक महिला कांच के टुकड़ों से घायल हुई, जबकि कई लोग भागने के दौरान गिरकर चोटिल हो गए। राहत एजेंसी मागेन डेविड एडोम के अनुसार, करीब 14 लोगों को मानसिक आघात के चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिसाइल एक सामुदायिक भवन पर गिरी, जिससे आसपास के घरों को नुकसान पहुंचा, हालांकि अधिकांश लोग समय रहते शेल्टर में पहुंच गए थे।

डिफेंस सिस्टम पर उठे सवाल, जांच के आदेश

इस हमले ने इजरायल की अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्सेस ने स्वीकार किया कि एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहा। इंटरसेप्टर सक्रिय किए गए थे, लेकिन वे लक्ष्य को नष्ट नहीं कर सके। सेना ने इस चूक की जांच के आदेश दे दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भविष्य में सुरक्षा रणनीतियों में बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।

क्यों कहा जाता है डिमोना को ‘लिटिल इंडिया’?

डिमोना शहर को ‘लिटिल इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के यहूदी रहते हैं। करीब 7,500 लोग भारतीय मूल से जुड़े हैं, जिनमें अधिकतर महाराष्ट्र से आए परिवार शामिल हैं। यहां की गलियों में आज भी मराठी भाषा सुनाई देती है और भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखती है। स्थानीय बाजारों में ‘सोनपापड़ी’, ‘गुलाब जामुन’ और ‘भेलपुरी’ जैसे भारतीय व्यंजन आसानी से मिल जाते हैं। इस हमले ने इस खास समुदाय को भी गहरे तौर पर प्रभावित किया है।

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