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“जांच पर कैसे भरोसा करूं?” – शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदका पुलिस पर गंभीर आरोप

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ चल रहे मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस निष्पक्षता से काम नहीं कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उनसे जुड़ी जांच से जुड़ी जानकारियां आरोप लगाने वाले व्यक्ति तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है।

व्हाट्सएप ग्रुप चैट का हवाला देकर पुलिस पर आरोप

शंकराचार्य ने विद्या मठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि एक व्हाट्सएप ग्रुप में 87 लोग जुड़े हुए हैं, जहां उनके खिलाफ दर्ज मामले से जुड़ी जानकारी साझा की जा रही है। उनका आरोप है कि यह जानकारी पुलिस की ओर से लीक की गई है, जो जांच प्रक्रिया की गोपनीयता पर सवाल खड़े करती है।

“अब केवल ईश्वरीय न्याय पर भरोसा” – शंकराचार्य

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में उन्हें पुलिस जांच से कोई उम्मीद नहीं बची है। उनका कहना है कि जब जांच से जुड़ी जानकारियां बाहर पहुंचाई जा रही हों, तो निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। शंकराचार्य ने कहा कि अब उनका भरोसा केवल ईश्वरीय न्याय पर ही रह गया है।

सरकार पर आरोप: “हमारी बात नहीं सुनी जाती”

शंकराचार्य ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारों के दौर में मतभेदों के बावजूद संवाद बना रहता था, लेकिन मौजूदा सरकार में उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने दावा किया कि जब भी उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की, उसे दबाने का प्रयास किया गया।

“चारों मठ गिरा दिए जाएं, अभियान नहीं रुकेगा”

शंकराचार्य ने कहा कि अगर सरकार उनके चारों मठ गिरा भी दे, तो भी उनके धार्मिक और सामाजिक अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गोरक्षा से जुड़े उनके प्रयास जारी रहेंगे और यदि वे धर्म के मार्ग पर चलेंगे तो समाज उनके लिए फिर से नए मठ खड़े कर देगा।

राम जन्मभूमि आंदोलन में मठों की भूमिका का दावा

उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी संघर्ष में विद्या मठ और शंकराचार्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार, जब अन्य राजनीतिक दलों और नेताओं को अदालत से निर्णय आने पर भरोसा नहीं था, तब शंकराचार्य परंपरा से जुड़े लोगों ने न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से संघर्ष जारी रखा।

सुप्रीम कोर्ट में गवाही और साक्ष्यों का उल्लेख

शंकराचार्य ने दावा किया कि उन्होंने और उनके गुरुओं ने सुप्रीम कोर्ट में लगातार 19 दिन तक गवाही दी थी। उन्होंने कहा कि उसी गवाही और प्रस्तुत किए गए ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर जन्मस्थान का निर्धारण किया गया और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

अयोध्या तीर्थ अंवेषण समिति और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला

उन्होंने कहा कि अयोध्या से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य, जैसे 18वीं सदी में लगाए गए सीमांकन पत्थरों और अयोध्या की पारंपरिक सीमाओं से जुड़े दस्तावेज, उनके वकील पी.एन. मिश्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष पेश किए गए थे। उनके अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों को फैसले में अहम माना गया।

पूरे मामले पर निष्पक्ष जांच की मांग

शंकराचार्य ने मांग की कि उनके खिलाफ दर्ज मामले की जांच निष्पक्ष और गोपनीय तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियां निष्पक्षता बनाए नहीं रखतीं, तो इससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।

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