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“विकास नहीं, सिर्फ वादों का पुलिंदा”: राजस्थान बजट 2026 पर भंवर जितेंद्र सिंह का तीखा हमलाबजट को बताया ‘फुस्स’, 2047 के भरोसे छोड़ने का आरोप……

पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह ने राजस्थान सरकार के बजट 2026 पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “फुस्स” करार दिया। उन्होंने कहा कि जैसे केंद्र का यूनियन बजट ठोस दिशा देने में विफल रहा, वैसे ही राज्य का बजट भी स्पष्ट रोडमैप और जवाबदेही से खाली है। उनके अनुसार सरकार 2026 में शासन चला रही है, लेकिन अधिकांश योजनाओं को 2047 के लक्ष्य से जोड़कर वर्तमान जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने विशेष रूप से स्वच्छ पेयजल जैसे बुनियादी मुद्दे के लिए भी 2047 तक की समयसीमा तय करने पर सवाल उठाया।

युवाओं के मुद्दे पर सवाल, RSTA गठन पर भी आपत्ति

बजट में National Testing Agency (NTA) की तर्ज पर Rajasthan State Testing Agency (RSTA) स्थापित करने की घोषणा पर भी सिंह ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब NTA स्वयं परीक्षा प्रक्रियाओं को लेकर विवादों में रही है, तब उसी मॉडल पर नई एजेंसी बनाना उचित नहीं है।
इसके अलावा, NET/SET/PhD योग्यता प्राप्त युवाओं को कम वेतन पर अस्थायी नियुक्ति देने की चर्चाओं को उन्होंने उच्च शिक्षा और युवाओं के साथ अन्याय बताया। उन्होंने मांग की कि सरकार को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार नीति स्पष्ट करनी चाहिए।

रोजगार और स्टार्टअप पर ‘रोडमैप’ की कमी का आरोप

सिंह ने कहा कि बजट में युवाओं को रोजगार देने की बात तो कही गई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि इसके लिए ठोस रणनीति क्या होगी। उनके अनुसार राज्य में व्यापारिक जटिलताओं, विभिन्न अनुपालनों (कंप्लायंसेस) और आर्थिक चुनौतियों के कारण स्टार्टअप और व्यवसायिक माहौल पहले से दबाव में है। ऐसे में केवल घोषणाओं से रोजगार सृजन संभव नहीं होगा।

“इवेंटबाजी से विकास नहीं”

उन्होंने Invest Rajasthan Summit और AI Summit जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े-बड़े कार्यक्रमों से अपेक्षित निवेश और परिणाम सामने नहीं आए। बजट में फिर से ऐसे आयोजनों की बात दोहराई गई है, लेकिन उनके अनुसार राज्य को ठोस औद्योगिक और बुनियादी परियोजनाओं की आवश्यकता है, न कि केवल इवेंट आधारित रणनीति की।

अलवर की अनदेखी का आरोप

भंवर जितेंद्र सिंह ने विशेष रूप से अलवर जिले का जिक्र करते हुए कहा कि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान होने के बावजूद यहां कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लाया गया। उन्होंने कहा कि पर्यटन और व्यापार की स्थिति कमजोर हुई है और इसे पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।
साथ ही उन्होंने अलवर को संभाग बनाने की मांग दोहराई और कहा कि जनसंख्या व क्षेत्रफल के आधार पर यह मांग उचित है, लेकिन बजट में इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

ग्रीन बजट के दावों पर भी सवाल

सिंह ने सरकार के ‘ग्रीन बजट’ दावों पर भी प्रश्न उठाए। उनका आरोप है कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों—जैसे सरिस्का क्षेत्र, अरावली क्षेत्र की परिभाषा, खनन गतिविधियां और पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी संरक्षण—पर सरकार की नीतियां स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरणीय मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तो ग्रीन बजट की घोषणाएं केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगी।

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