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शेख हसीना के लॉकर से 10 किलो सोना बरामद: एंटी-करप्शन विभाग की बड़ी कार्रवाई….

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब एंटी-करप्शन एजेंसियों ने उनके खिलाफ एक और बड़ा खुलासा किया है। जांच टीम ने बैंक में मौजूद दो लॉकर खोलकर लगभग 10 किलो सोने के आभूषण बरामद किए हैं, जिनमें विदेशी उपहार और राज्य पुरस्कार भी शामिल बताए जा रहे हैं।

दो लॉकर खोले, मिले 832 भर सोने के आभूषण

नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के सेंट्रल इंटेलिजेंस सेल (CIC) ने सोमवार को शेख हसीना के नाम पर पंजीकृत दो बैंक लॉकर खोले। इन लॉकरों—नंबर 751 और 753—में कुल 832.51 भर सोने के जेवर मिले। एक भर 11.664 ग्राम के बराबर होता है, यानी कुल बरामद सोना लगभग 10 किलो के आसपास बैठता है।

बाजार मूल्य 17.33 करोड़ टका, भारतीय मुद्रा में 12.7 करोड़ रुपए

CIC अधिकारियों के अनुसार, बरामद सोने का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 17.33 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 12.7 करोड़ रुपए होता है। यह कार्रवाई बैंक के नियमों के अनुसार एक संयुक्त टीम की मौजूदगी में की गई।

विदेशों से मिले उपहार और सरकारी अवॉर्ड भी बरामद

एक वरिष्ठ CIC अधिकारी ने बताया कि लॉकरों में बड़ी मात्रा में सोने के आभूषणों के साथ-साथ विदेशी संस्थाओं और अन्य राष्ट्रों से मिले उपहार, राज्य पुरस्कार और सम्मान सामग्री भी मिली हैं। जिन उपहारों को कानून के तहत राज्य खजाने में जमा होना चाहिए था, वे भी निजी लॉकर में पाए गए—यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।

तीसरे लॉकर की भी जांच, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला

उसी दिन शेख हसीना के नाम पर पंजीकृत एक और लॉकर पुबाली बैंक में खोला गया। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि इस तीसरे लॉकर में कोई कीमती सामान मौजूद नहीं था।

ICT कोर्ट ने मानवता के खिलाफ अपराध में सुनाई मौत की सजा

कुछ ही दिन पहले इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने 78 वर्षीय शेख हसीना को पिछले वर्ष छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ में गैर-हाज़िरी में मौत की सजा सुनाई है। इसी केस में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी समान सजा दी गई है।

क्या हसीना के खिलाफ आरोप अब नए मोड़ पर?

हसीना के लॉकरों से सोना और विदेशी उपहार मिलने के बाद यह केस अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं के दायरे में भी गहराता जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—

  • इतने बड़े पैमाने पर अवैध या अनजमा सरकारी उपहार क्या व्यक्तिगत उपयोग के लिए रखे गए थे?
  • क्या ये संपत्तियाँ पहले घोषित नहीं की गई थीं?
  • और क्या यह खुलासा भविष्य में नए मामलों और बड़े कानूनी कदमों का आधार बनेगा?

बांग्लादेश में यह मामला राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक नई हलचल पैदा कर रहा है।

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