मोहन भागवत के विदेशी दौरे पर विवाद, कनाडा में विरोध से बढ़ी सियासी हलचल
इंट्रो:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा दौरे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उनके प्रस्तावित कार्यक्रमों में प्रवासी भारतीयों से संवाद, विविधता, आपसी सम्मान और वैश्विक सद्भाव जैसे विषयों पर जोर दिया जा रहा है। वहीं कनाडा में कुछ सांसदों की ओर से RSS पर प्रतिबंध और भागवत के दौरे पर रोक लगाने की मांग ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। ऐसे में भागवत का यह विदेशी दौरा केवल प्रवासी भारतीयों से संपर्क तक सीमित नहीं, बल्कि RSS की वैश्विक छवि को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका में 5 हजार से ज्यादा लोगों के बीच कार्यक्रम
मोहन भागवत के विदेशी दौरे के दौरान अमेरिका में एक प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसका आयोजन ‘अमेरिकन हिंदूज़ फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ यानी AHEAD की ओर से किया जा रहा है। इसमें 5 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। कार्यक्रम की थीम RSS की भारत में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक राजनीतिक भाषा से कुछ अलग नजर आती है। इसमें विविधता में एकता, नागरिक भागीदारी, विभिन्न धर्मों के बीच संवाद, आपसी सम्मान और वैश्विक सद्भाव जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ के जरिए वैश्विक संदेश देने की कोशिश
भागवत के विदेश दौरे का एक प्रमुख संदेश ‘वसुधैव कुटुंबकम’ बताया जा रहा है। RSS की ओर से वैश्विक मंच पर इस विचार को मानव समाज के बीच आपसी जुड़ाव, सम्मान और साझा जिम्मेदारी से जोड़कर पेश किया जा रहा है। संघ से जुड़े विचारकों का मानना है कि विदेशों में हिंदू दर्शन और भारतीय सभ्यतागत विचारों को ऐसे सार्वभौमिक मूल्यों के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है, जिनसे अलग-अलग समुदायों के लोग संवाद स्थापित कर सकें। इस रणनीति को RSS की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
संघ की छवि को लेकर गलतफहमियां दूर करने पर जोर
विदेशों में RSS को लेकर अलग-अलग तरह की धारणाएं और आलोचनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में भागवत के दौरे को संगठन की विचारधारा और उसके सामाजिक दृष्टिकोण को सीधे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। RSS विचारक रतन शारदा के मुताबिक, ऐसे कार्यक्रमों में उन लोगों से संवाद पर जोर है जो जरूरी नहीं कि हिंदुत्व या RSS की विचारधारा से सहमत हों। उनका कहना है कि विविधता के बीच एकता और आपसी जुड़ाव को व्यापक मानवीय विचार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
कनाडा में भागवत के दौरे को लेकर विरोध
मोहन भागवत के कनाडा दौरे से पहले वहां विवाद भी सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक कनाडा के कुछ सांसदों ने RSS पर प्रतिबंध लगाने और भागवत के दौरे को रोकने की मांग की है। इन सांसदों की ओर से आरोप लगाया गया है कि संगठन की गतिविधियों से कनाडा में कुछ अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस तरह के आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है और भागवत के दौरे को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। इस विरोध ने उनके विदेशी दौरे को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।
अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा पर क्यों है नजर?
भागवत का अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब प्रवासी भारतीय समुदाय इन देशों में सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली भूमिका निभाता है। ऐसे में RSS के लिए प्रवासी भारतीयों से संवाद अपनी विचारधारा और भारतीय सभ्यतागत दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने का अवसर माना जा रहा है। भागवत पहले भी भारत को दुनिया पर प्रभुत्व जमाने के बजाय नैतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने की बात कह चुके हैं। अब उनके विदेशी कार्यक्रमों के जरिए इसी दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर सामने रखने की कोशिश दिखाई दे रही है।