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चीनी सेना के आधुनिकीकरण पर शी जिनपिंग का जोर, भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान तेज करने का ऐलान

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना को अधिक आधुनिक, अनुशासित और सक्षम बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को और तेज करने का संकल्प दोहराया है। कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना वर्षगांठ पर दिए गए संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेना पर पार्टी का पूर्ण नेतृत्व और सैन्य आधुनिकीकरण दोनों बेहद जरूरी हैं। हाल के वर्षों में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

सेना के आधुनिकीकरण को बताया राष्ट्रीय प्राथमिकता

कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि चीन को अपनी सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना होगा। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम सेना देश के दीर्घकालिक हितों के लिए आवश्यक है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पर कम्युनिस्ट पार्टी का पूर्ण नेतृत्व कायम रहना चाहिए, ताकि सैन्य व्यवस्था में अनुशासन और एकरूपता बनी रहे।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान जारी रखने का दोहराया संकल्प

शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि भ्रष्टाचार चीन के लिए एक दीर्घकालिक चुनौती है और इसके खिलाफ निर्णायक तथा व्यापक अभियान जारी रहेगा। पिछले कुछ वर्षों में चीन की सेना और रक्षा प्रतिष्ठान के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद कार्रवाई की गई है। इनमें पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू और रॉकेट फोर्स के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई प्रमुख मानी जाती है। चीन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य सेना में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाना है।

सेना में कार्रवाई के पीछे अलग-अलग दावे और विश्लेषण

हाल के वर्षों में चीनी सेना के भीतर बड़े स्तर पर हुए फेरबदल को लेकर विभिन्न विश्लेषण सामने आए हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान सेना में भ्रष्टाचार खत्म करने और सैन्य क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। वहीं, कुछ विश्लेषकों का यह भी तर्क है कि इन कार्रवाइयों का इस्तेमाल राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और चीन सरकार इन कार्रवाइयों को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा बताती रही है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकती है व्यापक नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी सेना में हो रहे सुधारों और पुनर्गठन पर भारत, ताइवान तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के अन्य देश लगातार नजर बनाए हुए हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी सैन्य तैनाती तथा ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण पीएलए की तैयारियों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चीन के भविष्य के सैन्य अभियानों या किसी संभावित युद्ध की समय-सीमा से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें विभिन्न रक्षा विशेषज्ञों के आकलन के रूप में देखा जाता है।

सैन्य सुधारों के साथ वैश्विक संदेश देने की कोशिश

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ताजा बयान को चीन की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक ओर बीजिंग सेना को आधुनिक हथियारों और नई तकनीकों से लैस करने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश भी जारी है। आने वाले समय में इन सुधारों का असर न केवल चीन की सैन्य क्षमता पर, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति और वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।

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