अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: SIT जांच की डेडलाइन बढ़ी, अब 15 जुलाई तक आएगी फाइनल रिपोर्ट
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में चल रही SIT जांच को उत्तर प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त समय दे दिया है। अब जांच टीम 15 जुलाई तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी। इसके साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ाया गया है, जिसमें दान की रकम के साथ-साथ मंदिर निर्माण के लिए की गई जमीन खरीद की जांच भी शामिल की गई है। मामले में पहले ही कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
SIT जांच को मिला अतिरिक्त समय, रिपोर्ट अब 15 जुलाई तक
सरकारी निर्णय के अनुसार, SIT को पहले 30 जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन जांच की गंभीरता को देखते हुए अब समयसीमा बढ़ाकर 15 जुलाई कर दी गई है। लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की निगरानी में गठित तीन सदस्यीय टीम इस पूरे मामले की जांच कर रही है। टीम ने अब तक अयोध्या में कई दिनों तक रहकर कर्मचारियों से पूछताछ की और दस्तावेजों की जांच की है।
शुरुआती जांच में सामने आई अनियमितताएं
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि मंदिर परिसर में दान राशि की गिनती और प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई। जांच टीम ने लगभग 150 कर्मचारियों से पूछताछ की और CCTV रिकॉर्डिंग की जांच की। रिपोर्ट के आधार पर पहले ही कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और बरामदगी भी की गई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
CCTV फुटेज और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई महत्वपूर्ण CCTV फुटेज या तो गायब थे या डिलीट कर दिए गए थे। कुछ रिकॉर्डिंग में यह भी संकेत मिले कि दान राशि की गिनती के दौरान कर्मचारी कैमरों की नजर से बचने की कोशिश कर रहे थे। SIT अब बैकअप डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
जांच का दायरा बढ़ा, जमीन खरीद की भी होगी जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब केवल चढ़ावे की गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए की गई जमीनों की खरीद-फरोख्त की भी जांच होगी। इस संबंध में कई शिकायतें और आरोप सामने आने के बाद SIT को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
15 जुलाई की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
SIT प्रमुख विजय विश्वास पंत के अनुसार, कई दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच अभी जारी है। माना जा रहा है कि 15 जुलाई को आने वाली फाइनल रिपोर्ट में केवल कर्मचारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा भी साफ हो सकती है। जांच के नतीजों पर पूरे मामले का भविष्य निर्भर करेगा।