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क्या 2064 तक आधी रह जाएगी दुनिया की आबादी? वैज्ञानिकों ने जताई बड़ी आशंका

क्या आने वाले कुछ दशकों में दुनिया की आबादी तेजी से घट सकती है? एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन, महामारी, युद्ध और संसाधनों की कमी जैसे बड़े संकट एक साथ गहराते हैं, तो वर्ष 2064 तक वैश्विक आबादी मौजूदा स्तर से लगभग आधी रह सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों ने इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं, बल्कि सबसे खराब परिस्थितियों पर आधारित संभावित परिदृश्य बताया है।

नई रिसर्च ने पेश किया चिंताजनक परिदृश्य

इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान और ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में वैश्विक जनसंख्या के भविष्य को लेकर कई संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि दुनिया को एक साथ कई बड़े संकटों का सामना करना पड़ा, तो मानव आबादी में अभूतपूर्व गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि यह निष्कर्ष केवल सबसे गंभीर परिस्थितियों के आधार पर तैयार किया गया एक वैज्ञानिक मॉडल है।

चार बड़े खतरे बन सकते हैं वजह

रिसर्च में चार प्रमुख जोखिमों की पहचान की गई है, जो भविष्य में जनसंख्या पर गहरा असर डाल सकते हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन से खाद्य उत्पादन प्रभावित होना, कोविड-19 जैसी नई महामारियां, बड़े युद्ध या परमाणु संघर्ष और पानी, भोजन तथा ऊर्जा जैसे संसाधनों की कमी शामिल हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ये संकट एक साथ सामने आते हैं तो उनका प्रभाव बेहद गंभीर हो सकता है।

12 हजार साल के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए एक विशेष गणितीय मॉडल का उपयोग किया और पिछले करीब 12 हजार वर्षों के जनसंख्या आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसके बाद अलग-अलग ऐतिहासिक परिस्थितियों और आधुनिक वैश्विक चुनौतियों को जोड़कर कई संभावित परिदृश्यों का आकलन किया गया। इसी प्रक्रिया के आधार पर वर्ष 2064 तक आबादी में बड़ी गिरावट की संभावना सामने आई।

दुनिया फिलहाल जनसंख्या विस्फोट की ओर नहीं बढ़ रही

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि 1970 के बाद से वैश्विक जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार लगातार धीमी हुई है। मौजूदा समय में दुनिया जनसंख्या विस्फोट की स्थिति में नहीं है, लेकिन यदि पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तेजी से खराब होती हैं, तो जनसंख्या में अचानक गिरावट आ सकती है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से अलग है तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की आबादी 2050 तक लगभग 9.7 अरब और इस सदी के अंत तक करीब 11 अरब तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूएन के अनुमान सामान्य परिस्थितियों पर आधारित हैं, जबकि नई रिसर्च असाधारण संकटों के संभावित प्रभावों का अध्ययन करती है। इसलिए दोनों आकलनों में सीधे तौर पर कोई विरोधाभास नहीं माना जा सकता।

वैज्ञानिकों ने इसे चेतावनी के रूप में देखा

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि 2064 तक आबादी आधी होने का दावा कोई तय भविष्य नहीं है। उनका उद्देश्य यह दिखाना है कि जलवायु संकट, संसाधनों पर बढ़ता दबाव और वैश्विक अस्थिरता भविष्य में मानव सभ्यता के सामने कितनी बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो ऐसे जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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