सुपरकंप्यूटर की रेस में चीन नंबर-1, लेकिन AI में अब भी अमेरिका का दबदबा कायम
चीन ने दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर LineShine तैयार कर तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में अमेरिका अब भी बढ़त बनाए हुए है, जहां एलन मस्क की xAI समेत कई अमेरिकी कंपनियां सबसे शक्तिशाली AI सिस्टम विकसित कर रही हैं।
LineShine के दम पर चीन ने हासिल किया शीर्ष स्थान
चीन ने एक बार फिर हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की दुनिया में अपनी ताकत दिखाई है। शेनझेन स्थित नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर का LineShine सिस्टम दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटरों की सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। करीब तीन साल बाद चीन ने इस सूची में दोबारा नंबर-1 स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि को चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि वैश्विक टेक प्रतिस्पर्धा में चीन की बढ़ती क्षमता का संकेत देती है।
घरेलू चिप्स के सहारे तैयार किया गया नया सिस्टम
LineShine की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह चीन में विकसित तकनीक और घरेलू चिप्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें किसी भी अत्याधुनिक अमेरिकी AI चिप का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस सिस्टम ने अमेरिका के एल कैपिटन सुपरकंप्यूटर को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। एल कैपिटन का उपयोग अमेरिकी सरकार संवेदनशील वैज्ञानिक और रक्षा संबंधी कार्यों के लिए करती है। चीन का यह कदम यह संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि वह विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
AI क्षमता के मामले में चीन अभी भी पीछे
हालांकि सुपरकंप्यूटिंग की पारंपरिक रैंकिंग में LineShine शीर्ष पर पहुंच गया है, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े प्रदर्शन के मामले में उसकी स्थिति उतनी मजबूत नहीं मानी जा रही। AI आधारित बेंचमार्क में यह सिस्टम शीर्ष तीन में भी जगह नहीं बना पाया। विशेषज्ञों के अनुसार बड़े AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और जटिल AI वर्कलोड संभालने के लिए अलग तरह की कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है, जिसमें अमेरिकी कंपनियों के सिस्टम फिलहाल आगे हैं। यही वजह है कि AI क्षेत्र में अमेरिका का वर्चस्व अभी भी कायम है।
तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने बढ़ाई अमेरिका-चीन की टक्कर
दोनों देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। अमेरिका पहले ही उन्नत चिप्स और उनसे जुड़ी तकनीक के निर्यात पर कई प्रतिबंध लगा चुका है। इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत तकनीकों में निवेश बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए हैं। दूसरी ओर, चीन घरेलू स्तर पर तकनीकी विकास को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बनने की रणनीति पर काम कर रहा है। LineShine की सफलता इसी दिशा में चीन के प्रयासों का एक प्रमुख उदाहरण मानी जा रही है।
AI की असली ताकत निजी कंपनियों के पास
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की AI प्रतिस्पर्धा में केवल पारंपरिक सुपरकंप्यूटर ही निर्णायक नहीं हैं। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल और एलन मस्क की xAI जैसी कंपनियों के पास अत्याधुनिक AI इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इन कंपनियों के सिस्टम बड़े पैमाने पर AI मॉडल विकसित करने और उन्हें संचालित करने के लिए तैयार किए गए हैं। चूंकि ये कंपनियां पारंपरिक सुपरकंप्यूटर रैंकिंग में हिस्सा नहीं लेतीं, इसलिए उनकी वास्तविक क्षमता सूची में दिखाई नहीं देती। इसी कारण AI क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त अब भी बरकरार मानी जा रही है।