बच्चों में डेंगू को लेकर WHO की पहली विशेष गाइडलाइन जारी, जानें कौन से लक्षण हैं खतरे की घंटी
बरसात के मौसम के साथ डेंगू के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार बच्चों में डेंगू की पहचान और उपचार को लेकर विशेष गाइडलाइन जारी की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि छोटे बच्चों में डेंगू तेजी से गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षणों और चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
100 से अधिक देशों में बढ़ा डेंगू का खतरा
WHO के अनुसार डेंगू अब 100 से ज्यादा देशों में फैल चुका है और यह बच्चों के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। हाल के वर्षों में डेंगू के मामलों और मौतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र के बच्चों में गंभीर संक्रमण और जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।
बच्चों के लिए अलग गाइडलाइन क्यों बनी?
WHO का कहना है कि फिलहाल डेंगू वायरस को खत्म करने वाली कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से शरीर में पानी की कमी को पूरा करने और लक्षणों को नियंत्रित करने पर आधारित है। चूंकि बच्चों की शारीरिक जरूरतें वयस्कों से अलग होती हैं, इसलिए उनके लिए अलग उपचार रणनीति तैयार की गई है।
शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बच्चों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, भूख कम लगना, मतली और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
ये संकेत बताते हैं कि स्थिति गंभीर हो सकती है
WHO के मुताबिक लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, अत्यधिक सुस्ती, नाक या मसूड़ों से खून आना, सांस लेने में परेशानी, हाथ-पैर ठंडे पड़ना और पेशाब कम होना गंभीर डेंगू के संकेत हो सकते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए बरतें ये सावधानियां
विशेषज्ञों ने माता-पिता को सलाह दी है कि बच्चों को पर्याप्त तरल पदार्थ दें, बुखार होने पर जांच करवाएं, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न दें और मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाएं। समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।