मां की हत्या के पीछे क्या था रिश्ता? जयपुर मर्डर केस में लिव-इन कनेक्शन की एंट्री
जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में जांच के दौरान लगातार नए दावे और आरोप सामने आ रहे हैं। पुलिस पहले ही इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक मुख्य आरोपी अब भी फरार है। इस बीच परिजनों और परिवादी पक्ष ने संपत्ति, सरकारी नौकरी और आरोपियों के आपसी संबंधों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
संपत्ति और सरकारी नौकरी के एंगल पर जांच
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार हत्या के पीछे सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपये की संपत्ति हासिल करने का उद्देश्य होने की आशंका की जांच की जा रही है। इस मामले में मृतका की बेटी आयुषी शर्मा सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, रवि उर्फ बलराम नामक आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम में सभी आरोपियों की भूमिका और उनके बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।
परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
मृतका के परिजनों का आरोप है कि घटना से पहले भी पुलिस को शिकायत दी गई थी, जिसमें घर में घुसकर ताला तोड़ने, नकदी और आभूषण चोरी होने की जानकारी दी गई थी। उनका कहना है कि यदि उस समय प्रभावी कार्रवाई की जाती तो बाद की घटनाओं को रोका जा सकता था। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि चोरी की गई संपत्ति का इस्तेमाल कथित साजिश में किया गया। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है और पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।
पति की मौत और रिश्तों को लेकर भी नए आरोप
परिजनों ने मृतका के पति विजय शर्मा की मौत को भी संदिग्ध बताते हुए उसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने दावा किया है कि आयुषी शर्मा और फरार आरोपी रवि उर्फ बलराम के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हत्या की कथित साजिश में बलराम की अहम भूमिका थी। हालांकि, इन दावों की अभी तक पुलिस या अदालत की ओर से पुष्टि नहीं की गई है और इन्हें जांच का हिस्सा माना जा रहा है।
फरार आरोपी की तलाश जारी, जांच पर टिकी निगाहें
पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास लगातार जारी हैं। डिजिटल साक्ष्य, बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले से जुड़े नए आरोपों और दावों का सत्यापन जांच प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है।
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