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केंद्र सरकार का क्या है ‘E20 फ्यूल मिशन’? पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम फिलहाल मूल्यांकन और निगरानी के चरण में है तथा इसके व्यापक प्रभावों का आकलन अगले वर्ष तक अधिक स्पष्ट हो सकेगा। दूसरी ओर, कुछ पक्षों ने पुराने वाहनों पर इसके असर और इथेनॉल आवंटन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।

क्या है E20 फ्यूल मिशन?

E20 फ्यूल वह पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाने वाला जैव ईंधन (Biofuel) है। केंद्र सरकार का उद्देश्य इस मिश्रण के जरिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि E20 परियोजना एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है और इसका मूल्यांकन अभी जारी है। उन्होंने अदालत को बताया कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि E20 ईंधन से वाहनों के इंजन को व्यापक नुकसान होता है। सरकार के अनुसार, योजना के दीर्घकालिक परिणामों का आकलन अगले वर्ष तक और स्पष्ट हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट तक मामला क्यों पहुंचा?

विवाद की शुरुआत 2025-26 के इथेनॉल आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर हुई। कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक इथेनॉल निर्माता की याचिका पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ भारत पेट्रोलियम (BPCL) सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कंपनी का तर्क है कि आवंटन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उसमें बदलाव से पूरी आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

सरकार की दलील क्या है?

केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि यदि किसी एक कंपनी का इथेनॉल कोटा बढ़ाया गया तो अन्य कंपनियां भी समान मांग कर सकती हैं। इससे नई कानूनी चुनौतियां पैदा होंगी और पूरे आवंटन तंत्र पर असर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इससे E20 मिशन की गति भी प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश है?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा इथेनॉल आवंटन व्यवस्था में अभी कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही अदालत ने इस पूरे मामले पर व्यापक सुनवाई की आवश्यकता पर भी संकेत दिया है।

देश के लिए क्यों अहम है E20 मिशन?

E20 मिशन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम होगा, पर्यावरण को लाभ मिलेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं वाहन मालिकों और उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर है कि परीक्षण और न्यायिक प्रक्रिया के बाद इस योजना का अंतिम स्वरूप क्या होगा।

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