आंखों से लगातार पानी आना हो सकता है बीमारी का संकेत, जानिए कारण और बचाव के उपाय
अगर आपकी आंखों से बार-बार पानी आता है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार आंखों से पानी गिरना कई बार ‘ड्राई आई डिजीज’ या रिफ्लेक्स टियरिंग का संकेत हो सकता है। समय रहते कारणों को समझकर सही इलाज और देखभाल अपनाना जरूरी है।
हर समय आंखों से पानी आना सामान्य नहीं
आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय लगातार बढ़ रहा है। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार आंखों से पानी आना हमेशा आंखों की अच्छी सेहत का संकेत नहीं होता। कई मामलों में यह आंखों की सतह पर मौजूद नमी के असंतुलन या किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा करता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ड्राई आई डिजीज से भी आ सकते हैं आंसू
सुनने में यह विरोधाभासी लग सकता है, लेकिन सूखी आंखें भी अधिक आंसू आने की वजह बन सकती हैं। जब आंखों की प्राकृतिक नमी कम हो जाती है, तो शरीर उसकी भरपाई के लिए अतिरिक्त आंसू बनाता है। इस प्रक्रिया को ‘रिफ्लेक्स टियरिंग’ कहा जाता है। हालांकि ये आंसू आंखों को पर्याप्त चिकनाई नहीं दे पाते, जिससे जलन, चुभन, लालिमा और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं भी साथ में हो सकती हैं।
एलर्जी, संक्रमण और स्क्रीन टाइम भी हो सकते हैं कारण
लगातार आंखों से पानी आने के पीछे केवल ड्राई आई ही जिम्मेदार नहीं होती। धूल, प्रदूषण या परागकणों से होने वाली एलर्जी, आंखों का संक्रमण, आंसू की नलिकाओं में रुकावट और लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत भी इसकी वजह बन सकती है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ आंखों की नमी बनाए रखने की क्षमता कम होने लगती है, जिससे यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर आंखों से पानी आने के साथ जलन, खुजली, लालिमा, रोशनी से परेशानी, धुंधला दिखना या आंखों में कुछ चुभने जैसा महसूस हो रहा है, तो विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है। लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या आंखों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। समय पर उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
ऐसे रखें अपनी आंखों का ख्याल
आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय नियमित ब्रेक लेना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना, आंखों को बार-बार रगड़ने से बचना और धूल या प्रदूषण से सुरक्षा करना फायदेमंद हो सकता है। यदि डॉक्टर सलाह दें, तो आर्टिफिशियल टियर्स या अन्य दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। किसी भी समस्या के लंबे समय तक बने रहने पर स्वयं इलाज करने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।