विश्वेन्द्र सिंह का कांग्रेस संगठन पर हमला, भरतपुर-डीग की राजनीति में हलचल तेज
भरतपुर कांग्रेस की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने सोशल मीडिया पर जिला संगठन को लेकर सीधा हमला बोला। उन्होंने भरतपुर और डीग जिला कांग्रेस अध्यक्षों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए संगठन की कमजोरियों और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। उनकी इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और इसे संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।
जिला संगठन पर सीधा हमला, कार्यशैली पर उठे सवाल
विश्वेन्द्र सिंह ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि भरतपुर और डीग जिला कांग्रेस कमेटियों के पास आज तक कोई स्थायी पार्टी कार्यालय तक नहीं है। उन्होंने कहा कि आम कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है और संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर होता जा रहा है। साथ ही उन्होंने जिला नेतृत्व पर निष्क्रियता के आरोप लगाते हुए कहा कि संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिख रही है, जिससे पार्टी की पकड़ क्षेत्र में कमजोर पड़ रही है।
राहुल गांधी के जन्मदिन को लेकर भी उठाए सवाल
पूर्व मंत्री ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल खड़ा किया कि जिला नेतृत्व राहुल गांधी का जन्मदिन तक सही ढंग से याद नहीं रख सका। इसे उन्होंने संगठन की गंभीरता और प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न बताया। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है और कई लोग इसे संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व क्षमता से जोड़कर देख रहे हैं। इस टिप्पणी ने जिले की राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।
अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी की अटकलें तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिला कार्यकारिणी में विश्वेन्द्र सिंह समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से यह असंतोष सामने आया है। इसे संगठन के भीतर गुटबाजी और नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भरतपुर और डीग क्षेत्र में पहले से ही कांग्रेस कमजोर स्थिति में है, ऐसे में यह विवाद पार्टी की रणनीति और एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिलाध्यक्षों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया वार
विश्वेन्द्र सिंह की पोस्ट पर अब तक दोनों जिला कांग्रेस अध्यक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, भरतपुर जिला अध्यक्ष दिनेश सूपा ने राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह की अखबारों की कटिंग सोशल मीडिया पर साझा की है, जिसे राजनीतिक हलकों में अप्रत्यक्ष जवाब माना जा रहा है। इससे साफ है कि यह मामला अब सोशल मीडिया से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।